(रिपोर्ट-विनोद नैय्यर)कुल्लू, 25 जुलाई। माॅनसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, स्क्रब टाईफस व कालाजार सहित अन्य जल जनित बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। इन बीमारियों की रोकथाम पर आवश्यक मंथन के उद्देश्य से शनिवार को उपायुक्त डाॅ. ऋचा वर्मा की अध्यक्षता में जिला टाॅस्क फोर्स समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की कार्यवाही का संचालन मुख्य चिकत्सा अधिकारी डाॅ. सुशील चंद्र ने किया।बैठक में जानकारी दी गई कि बरसात के मौसम में स्क्रब टाईफस के मामले ज्यादा बढ़ जाते हैं। लोगों से अपील की गई कि घास काटने के लिए जब भी बाहर जाएं तो पूरा शरीर ढका हुआ होना चाहिए। आस-पास अनावश्यक झाड़ियों को न पनपने दें। खड्डों को भर दें ताकि इनमें पानी एकत्र न हो। जल शक्ति विभाग से स्वच्छ व सुरक्षित पेयजल उपलब्ध करवाने को कहा गया। सीएमओ ने बताया जिला की 1.42 लाख की आबादी मलेरिया संवेदनशील है। डेंगू के मामले जिला में नहीं है। मलेरिया संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
यह भी अवगत करवाया गया कि सतलुज की सीमा के साथ लगते निरमण्ड व आनी में कालाजार पाया जाता है। स्वास्थ्य विभाग इसकी रोकथाम के लिए अभी से तैयारियां कर रहा है।
पानी की टंकियों व बावड़ियों की सफाई करें लोग।
जल शक्ति विभाग को पानी के टैंकों में नियमित तौर पर क्लोरीनेशन सुनिश्ति करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने विभाग से इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा कि कितने टैंको व स्त्रोतों की सफाई तथा क्लोरीनेशन करवाई गई। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे अपने घरों की टंकियों की सफाई करें। बावडियों व अन्य जल स्त्रोतों की भी सफाई करें। बेशक विभाग मुख्य टैंकों की सफाई करवा रहा है लेकिन पानी की लाईन कभी-कभार लीक होने के कारण मल निकास लाईनों के संपर्क में आ जाती है और पानी को दूषित कर देती है।
उपायुक्त ने शिक्षा विभाग से कहा कि स्कूलों में सभी टंकियों की सफाई करवाएं और सफाई का एक चार्ट भी डिस्पले करें। इस संबंध में उपायुक्त ने रिपोर्ट सौंपने को भी कहा।
सीएमओ ने कहा कि क्लोरीन की एक गोली 20 लीटर पानी की बाल्टी के लिए पर्याप्त होती है और इसे डालने के कुछ देर बाद पानी का उपयोग करना चाहिए। हालांकि बरसात के दिनों पानी को उबाल कर ही पीने की उन्होंने सलाह दी।
स्कूली स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया जाएगा
कोविड-19 के संकट के चलते स्कूल स्वास्थ्य कार्यक्रमों को पुनः आरंभ करने पर गहन विचार किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अवगत करवाया कि उन्होंने सभी आशा कार्यकर्ताओं को उनके अधिकार क्षेत्रों के गांवों में बच्चों की लिस्टें तैयार करने को कहा गया है। गांव में ही उनका टीकाकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बच्चों व स्कूली स्वास्थ्य से जुड़े सभी कार्यक्रमों को एक साथ चलाया जाएगा।
उपायुक्त ने इस कार्यक्रम को कोई नाम देने की बात कही ताकि एक छत्र तले सभी प्रकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन सुनिश्चित बनाया जा सके। उन्होंने सोशल डिस्टेंसिंग के साथ एसओपी का पूरा ख्याल रखने को कहा। उन्होंने टीकाकरण करने वाले कर्मियों की कोविड-19 जांच करने के भी निर्देश दिए।  
सीएमओ ने अवगत करवाया कि मेनस्ट्रुअल हाईजीन कार्यक्रम आशा वर्करों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एचआईवी/एड्स के नियमित तौर पर टैस्ट किए जा रहे हैं और इसे गोपनीय रखा जाता है। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच की जा रही है। जिला के सभी पांचों स्वास्थ्य खण्डों में एचआईवी जांच की सुविधा उपलब्ध है।
क्षयरोग जानलेवा है यदि दवाई का नियमित सेवन न किया जाए
राष्ट्रीय क्षयरोग निवारण कार्यक्रम का जिला में प्रभावी कार्यान्वयन किया जा रहा है। सीएमओ ने कहा कि जिला में 2019 में 2148 मामले क्षयरोगियों के थे और 2020 में 917 नए मामले आए। बीते साल क्षयरोग से 60 लोगों की मौत हुई है और 2020 में 20 लोग काल का ग्रास बने हैं। उन्होंने अवगत करवाया कि आशा वर्कर डाॅट वर्कर की भूमिका निभा रही हैं। क्षयरोग का पता लगाने के लिए जिला के 90 प्रतिशत लोगों के टैस्ट किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा क्षयरोग जानलेवा हो सकता है यदि इसकी दवाई का नियमित तौर पर सेवन न किया जाए। इसके साथ तंबाकु छुडाने पर भी स्वास्थ्य विभाग काम कर रहा है। क्षयरोग के लिए डायबिटीज टैस्ट भी किए जा रहे हैं। गांवों में बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए आंगनवाड़ियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
27 जुलाई से जिला में सघन डायरिया अभियान चलेगा
डाॅ. सुशील चंद्र ने कहा कि जिला में 27 जुलाई से 11 अगस्त तक सघन डायरिया पखवाड़ा चलाया जाएगा। इस दौरान आशा वर्करों द्वारा प्रत्येक घर में ओआरएस के पैकेट व जिंक टेबलेट प्रदान की जाएगी जहां पंाच साल आयु तक के बच्चे हैं। उन्होंने कहा कि डायरिया होने पर इसकी सूचना तुरंत आशा वर्कर अथवा स्वास्थ्य विभाग को दें। डायरिया की स्थिति में बच्चे अथवा नौजवान में पानी की कमी न होने दे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक मां कम से कम छः माह तक बच्चे को अपना दूध पिलाएं। यह बहुत आवश्यक है जो बच्चे को भविष्य में होने वाली अनेक बीमारियों से सुरक्षित रखता है। उन्होंने इस बारे पंचायती राज संस्थानों, स्वास्थ्य कर्मियों व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता पर बल दिया।
आईईसी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर उपायुक्त का बल
डाॅ. ऋचा वर्मा ने स्वास्थ्य विभाग से कहा कि लोगों में जल जनित रोगों तथा स्कूली स्वास्थ्य कार्यक्रम के अलावा अन्य विभागीय कार्यक्रमों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल मोड अथवा सोशल मीडिया को माध्यम बनाया जाए। कोविड-19 के दौरान यह आवश्यक है कि गतिविधियां अवरूद्ध नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पंचायती राज संस्थानों, महिला व युवक मण्डलों तथा स्कूली बच्चों को सूचना, शिक्षा व संप्रेषण गतिविधियों से जोड़ने को कहा। उन्होंने शिक्षा विभाग से कहा कि आॅन लाईन शिक्षण कार्यक्रम में बच्चों को स्वास्थ्य, टीकाकरण तथा स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों का चार्ट बनाकर उपलब्ध करवाया जाए ताकि वे जागरूक हों।
बैठक में खण्ड चिकित्सा अधिकारियों के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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