कृषि उपज विपणन समिति (APMC) शिमला-किन्नौर पर भारतीय जनता पार्टी ने दुकानों और सीए स्टोर के आवंटन में घोटाले के गंभीर आरोप लगाए है। शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा, मुख्यमंत्री के कहने पर APMC में महा घोटाला किया गया। करोड़ों रुपए से बनी मंडियों में दुकानें कौड़ियों के भाव दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि APMC सेक्रेटरी पवन सैणी के रिश्तेदारों को दुकानें दी गई। संदीपनी भारद्वाज ने कहा, मार्केटिंग बोर्ड द्वारा पराला व खड़ापत्थर में बनाए गए सीए स्टोर में भी घपला किया गया। सीए स्टोर का बेस प्राइस 3 करोड़ 35 लाख रुपए तय किया गया और 3 करोड़ 36 लाख रुपए में सीए स्टोर लुधियाना की एक कंपनी अरमान एंटरप्राइज को 3.36 करोड़ में दिया गया। इस रेट से पराला व खड़ापत्थर में सीए यूनिट बनाने में जो लागत आई है, वह 15 साल में भी पूरी नहीं हो पाएगी। उन्होंने सीए स्टोर के आवंटन और इसकी टेंडर प्रक्रिया की जांच की मांग की है। दुकानों के आवंटन में भी गड़बड़ी संदीपनी भारद्वाज ने कहा, एपीएमसी ने इस बार जिले की अलग-अलग मंडियों में जितनी भी दुकानें आवंटित की है, उनमें गड़बड़ी की गई। पूर्व की सरकार के कार्यकाल में 10 हजार से 80 हजार रुपए में दुकानें किराए पर दी गई। मौजूदा सरकार ने भाई-भतीजावाद के आधार पर औने-पौने दाम पर दी है। उन्होंने आरोप लगाया, APMC सेक्रेटरी पवन सैनी ने अपने रिश्तेदार अनिरुद्ध सैनी को शॉप नंबर 27 शिलारू में मात्र 5000 प्रतिमाह किराए पर दी। उन्होंने एपीएमसी द्वारा दी गई दुकानों के आवंटन पर रोक लगाने की मांग की है और पारदर्शिता के साथ दोबारा से दुकानों को आवंटन करने की मांग की है। बता दें कि APMC में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद सरकार ने सचिव पवन सैनी और दूसरे कर्मचारी यशपाल को चंबा के लिए ट्रांसफर किया है। बिना वजह एप्लिकेशन रिजेक्ट किया: संदीपनी संदीपनी ने कहा, पराला मंडी में 34 दुकानों का आवंटन किया गया, जहां 52 एप्लिकेशन आई, उसमें से 18 बिना वजह रिजेक्ट कर दी गई। टुटू में 8 दुकानें आवंटित की गई, 17 में से 9 एप्लिकेशन, शिलारू में 28 दुकानों के लिए 64 एप्लिकेशन में से 36 रिजेक्ट की गई। उन्होंने कहा, दुकानों और सीए स्टोर में बेस-प्राइस को लेकर गड़बड़ी हुई। APMC ने जो बेस प्राइस रखा, दुकानें व सीए स्टोर उस प्राइस से 1% ज्यादा पर आवंटन कर दिए गए। नियमों की उड़ाई धज्जियां: भारद्वाज संदीपनी ने कहा, नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दुकानों का आवंटन किया गया। 25% दुकानें स्थानीय फल उत्पादक, 50% होल-सेल और 10% सहकारिता संस्थानों को जानी थी। इसमें कुछ दुकानें ऑर्गेनिक फल दवाइयों के लिए भी थी जिसको प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। बोली के आधार पर दुकानों का आवंटन: देवानंद इसे लेकर APMC के चेयरमैन देवा सेन ने बताया, बोर्ड के कायदे के अनुसार एप्लिकेशन इनवाइट की। टाइम दिया गया। जो मापदंड पूरा करते थे उन्हें कंसिडर किया गया। ओपन बिड में सबसे ऊंची बोली देने वाले को दुकानें दी गई। इसकी बाकायदा वीडियोग्राफी की गई। उन्होंने बताया कि ठीक इसी तरह टेंडर के आधार पर सीए स्टोर भी दिया गया है।

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