हिमाचल के सियासी गलियारों में शिक्षा मंत्री एवं जुब्बल कोटखाई से विधायक रोहित ठाकुर के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की चर्चाएं है। दिल्ली में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ मीटिंग के बाद ऐसी चर्चाएं शुरू हुई है। इससे पहले तक उनका नाम चर्चा में नहीं था। मगर अब अनुभवी रोहित ठाकुर को प्रबल दावेदारों में गिना जा रहा है। रोहित ने हाईकमान के पूछने पर पार्टी अध्यक्ष बनने को कन्सेंट भी दे दी है। उन्होंने कहा, पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाने को तैयार है। रोहित ठाकुर 4 बार के MLA हैं। वह पूर्व वीरभद्र सरकार में CPS भी रह चुके हैं। सुक्खू सरकार में पहली बार मंत्री बने हैं। रोहित ठाकुर के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से उन्हें कैसे फायदा और क्या नुकसान होगा? कांग्रेस संगठन और सुक्खू कैबिनेट पर इसका क्या असर पड़ेगा? 5 प्वाइंट में समझे.. रोहित के अलावा ये चेहरे अध्यक्ष की रेस में रोहित ठाकुर के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में नया नाम पालमपुर से 2 बार के MLA आशीष बुटेल का जुड़ा हैं। बुटेल को लेकर दिल्ली में भी चर्चा हो चुकी हैं। बुटेल कांगड़ा की राजनीति में अच्छा रसूख रखते हैं, क्योंकि उनके पिता बीबीएल बुटेल भी 5 बार के विधायक रह चुके हैं। रोहित और बुटेल से पहले कुलदीप राठौर, अनिरुद्ध सिंह, संजय अवस्थी, विनय कुमार, विनोद सुल्तानपुरी और सुरेश कुमार के नाम चर्चा में रहे हैं। SC कोटे से अध्यक्ष बनाया गया तो विनय कुमार हाईकमान की पहली पसंद हो सकती है। वह प्रदेश कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं। बुटेल अध्यक्ष बने तो कांगड़ा मंत्री पद से चूक जाएगा वहीं आशीष बुटेल अध्यक्ष बनाए गए तो कांग्रेस संगठन में तो कांगड़ा जिला को नेतृत्व मिल जाएगा, लेकिन मंत्री पद की उम्मीद खत्म हो सकती है। पूर्व की सरकारों में कांगड़ा जिला से 3-3 मंत्री बनते रहे हैं। मगर सुक्खू सरकार में 2 ही मंत्री बनाए गए है। दूसरा मंत्री भी एक साल बाद यानी पहले कैबिनेट विस्तार के वक्त बनाया गया। सुक्खू के 8 मंत्रियों ने जब शपथ ली थी तब कांगड़ा से एक ही मंत्री बनाया गया था।

Spread the love