हिमाचल के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमे मंत्री ने कहा था कि जयराम को जब अपने पांव में दर्द हुआ, तब वह दिल्ली जाने को तैयार हुए हैं। जयराम ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मंत्री को पूछा जाए कि वह ऐसे बयान क्यों दे रहे हैं? नेता प्रतिपक्ष ने कहा, क्या जगत नेगी को इस बात में आनंद का अनुभूति हो रही है कि एक रात में 42 लोग एक साथ चले गए। जयराम ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, उनके सराज विधानसभा में भारी बारिश से 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है, मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने राहत एवं बचाव कार्य के लिए केवल 1 करोड़ रुपए दिए हैं। उन्होंने कहा, जिस गंभीरता से सरकार को राहत एवं बचाव कार्य करना चाहिए था, वह नहीं हो रहा। उन्होंने कहा, सरकार ने किसी के दबाव में आपदा के वक्त PWD के एक्सईन को बदल डाला है, जबकि इन दिनों क्षेत्र में सड़कों की स्थिति को देखते हुए एक्सईन की सबसे ज्यादा जरूरत है। ​​​​​​ पंचायतीराज के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट शिफ्ट करने के बहाने ढूंढे जा रहे: जयराम जयराम ठाकुर ने कहा, राज्य सरकार पंचायतीराज के ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को थुनाग से शिफ्ट करना चाह रही है। अब इसके लिए बहाने ढूंढे जा रहे हैं। पूर्व सरकार द्वारा 206 बीघा पर स्थापित हॉर्टिकल्चर कॉलेज को शिफ्ट किया जा रहा है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से फॉरेस्ट क्लीयरेंस ली गई। दफ्तरों को शिफ्ट करने के आपदा में अवसर ढूंढे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, त्रासदी में ओर जख्म न दिए जाए।
जयराम ने मंडी को मांगा स्पेशल पैकेज आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद जयराम ठाकुर ने कहा, मुख्यमंत्री को कैबिनेट बैठक में मंडी जिले के लिए विशेष आपदा पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। क्षेत्र में बिजली, पानी और सड़कों की स्थिति अत्यंत खराब है। कुछ जगहों पर अस्थायी व्यवस्था की गई है। मगर अधिकांश क्षेत्र अभी भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा, मंडी जिले में 30 जून की रात बारिश से भारी नुकसान हुआ है। मंडी में एक ही रात में ही 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति तबाह हुई है। 100 से ज्यादा पैदल पुल और 18 वाहन योग्य पुल उनके विधानसभा क्षेत्र में बहे हैं। सड़क कनेक्टिविटी अभी भी अस्थाई है। उन्होंने कहा, 5-5 बीघा जमीन 2-2 किलोमीटर दूर तक बहकर चली गई है। बागवानों के 300 से 500 प्लांट बह गए। फ्लोरीकल्चर को बहुत ज्यादा नुकसान है। किसानों के पॉलीहाउस बह गए हैं।

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