हिमाचल प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने कांगड़ा के मटौर स्थित उत्सव पैलेस में निर्यात योग्य बासमती चावल उत्पादन पर आयोजित कार्यशाला की अध्यक्षता की। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नवाचार अपनाने का आह्वान किया। कृषि मंत्री ने बताया कि जिले में 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। इसमें 15 प्रतिशत बासमती धान की खेती ज्वाली, फतेहपुर, इंदौरा और रेत क्षेत्र में की जाती है। कांगड़ा, नगरोटा बागवां और भवारना विकास खंड में भी बासमती चावल उगाया जाता है। अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाए कदम प्रदेश सरकार ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। प्राकृतिक गेहूं पर 60 रुपए, मक्की पर 40 रुपए और कच्ची हल्दी पर 90 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है। भैंस के दूध की खरीद 61 रुपए और गाय के दूध की खरीद 51 रुपए प्रति लीटर की दर से की जा रही है। कृषि आधारित प्रदर्शनी का आयोजन कार्यक्रम में कृषि आधारित प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। किसानों ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए आवेदन दिए। इस अवसर पर एसडीएम इशांत जसवाल, निशु मोंगरा सहित कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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