केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। CDSCO की जांच में हिमाचल प्रदेश में बनी 37 दवा कंपनियों की 50 मेडिसिन के सैंपल फेल हुए है। पूरे देश में 186 दवाइयों के सैंपल फेल पाए गए। CDSCO द्वारा शुक्रवार देर रात जारी मई महीने के ड्रग अलर्ट के मुताबिक 58 दवाओं के सैंपल CDSCO व सेंट्रल लेबोरेटरी की जांच में खरा नहीं उतरे, जबकि 128 सैंपल अलग अलग राज्यों की अपनी लेबोरेटरी की जांच में फेल पाए गए। हैरानी इस बात की है कि 20 राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों ने मई माह में जांची गई दवाइयों की रिपोर्ट CDSCO को नहीं दी। सभी राज्यों की जांच रिपोर्ट आने के बाद फेल दवाइयों की संख्या कई गुणा बढ़ेगी। यह चिंताजनक है कि क्योंकि इन दवाइयों को मरीज हजारों रुपए खर्च करके खरीदते है। मगर ये दवाएं किसी काम की नहीं। हार्ट-बीपी जैसी बीमारियों की दवाएं फेल इन दवाइयों का एसिडिटी, बुखार, पेट के अल्सर, हार्ट, हाई बीपी, सूजन और आर्थराइटिस जैसी बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। हिमाचल में इन क्षेत्रों में बनी दवाएं फेल हिमाचल के कालाअंब, सोलन, बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, पांवटा साहिब, ऊना और कांगड़ा के उद्योगों में सब स्टैंडर्ड दवाइयां बनाई जा रही है। ड्रग कंट्रोलर ने दिए जांच के आदेश हिमाचल के ड्रग कंट्रोलर मनीष कपूर ने बताया, ड्रग अलर्ट में जिन उद्योगों की दवाओं के सैंपल फेल हुए है, उन सभी को नोटिस जारी किए जाएंगे। संबंधित दवाओं का स्टॉक बाजार में नहीं भेजने के निर्देश दिए जाएंगे। जिन कंपनियों की दवाइयों के सैंपल बार बार फेल हो रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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