हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड की गलती से एक स्टूडेंट की जान खतरे में पड़ गई है। पालमपुर की 12वीं की स्टूडेंट को बोर्ड ने 17 मई को जारी रिजल्ट में दो विषयों में फेल कर दिया था। इससे तनाव में आकर स्टूडेंट ने कीटनाशक पी लिया।स्टूडेंट को अंग्रेजी और राजनीति शास्त्र में फेल दिखाया गया था। कीटनाशक पीने के बाद उसे पहले पालमपुर अस्पताल ले जाया गया। बाद में टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। अब छात्रा की दोनों किडनियां खराब हो गई हैं। पिता की पहले हो चुकी मौत वहीं शिक्षा बोर्ड ने बीते दिनों स्कूल शिक्षा बोर्ड ने रिजल्ट में संशोधन कर सुधार किया है। नए रिजल्ट के अनुसार स्टूडेंट को पास घोषित कर दिया गया है। जिससे बोर्ड की लापरवाही सामने आई है। बता दें कि स्टूडेंट के पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। परिवार में मां और दो बहनें हैं। मां ही पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। बोर्ड की इस लापरवाही को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या है पूरा मामला बता दें कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड 17 मई को 12 वीं के नतीजे घोषित किए थे। जिसमें विशेष कर अंग्रेजी के पेपर पर सवाल उठ रहे थे। स्कूल शिक्षा बोर्ड के सुधार के बाद 4,722 विद्यार्थियों पास हो गए है। जिसमें एक स्टूडेंट यह भी शामिल है। वहीं कई स्टूडेंट की मेरिट सूची में भी सुधार हुआ है। बोर्ड के संशोधन होने से चार दिन पहले खुशियां बटोरने वाले कई मेधावियों को भी निराशा का सामना करना पड़ेगा। कई मेधावी टॉप सूची से बाहर कई की रैंकिंग परीक्षा परिणाम में संशोधन से एक-एक पायदान लुढ़की है, लेकिन माना जा रहा है कि कई मेधावी अब टॉप-10 सूची से बाहर हो जाएंगे। चार दिन पहले यानी 17 मई 2025 को स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 12वीं कक्षा के तीनों संकाय का त्रुटिपूर्ण परिणाम घोषित कर कई विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में झोंक दिया था, क्योंकि 12वीं के बाद बच्चे नीट के जरिए डॉक्टरी और जेईई माध्यम से इंजीनियरिंग व अन्य उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लेते हैं। बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल पहले शिक्षा बोर्ड की ओर से 2,713 विद्यार्थियों को फेल किया गया था। इतना ही नहीं बोर्ड की गलती से 2009 विद्यार्थियों को भी जमा दो की परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए दोबारा से कंपार्टमेंट की परीक्षा देनी पड़ती। अब बुधवार को प्रदेश शिक्षा बोर्ड की ओर से रिवाइज परीक्षा परिणाम में अब इन विद्यार्थियों को राहत मिली है। ऐसे में शिक्षा बोर्ड की ओर से परीक्षा परिणाम में इतनी बड़ी चूक को लेकर कार्यप्रणाली पर भी सवाल भी उठने लगे हैं। रिवाइज परीक्षा परिणाम में राहत मिली इस मानवीय भूल के चलते ढाई हजार से अधिक विद्यार्थियों को पास होने के बावजूद फेल कर दिया गया था, जबकि अंग्रेजी विषय में 2009 विद्यार्थियों को पास होने के बावजूद कंपार्टमेंट घोषित कर दिया गया था, जिन्हें अब रिवाइज परीक्षा परिणाम में राहत मिली है। गौर रहे कि प्रदेशभर में 86,373 विद्यार्थियों ने जमा दो की परीक्षा दी थी। बोर्ड की ओर से 17 मई को घोषित परीक्षा परिणाम में 71,591 विद्यार्थी परीक्षा पास किए गए थे। बुधवार को दोबारा निकले परिणाम में 76,315 विद्यार्थियों ने परीक्षा पास की है। पहले 8581 विद्यार्थी परीक्षा फेल और 5847 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट थी। अब 5868 विद्यार्थी फेल और 3838 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट है। बोर्ड की प्रोविजनल मेरिट सूची जारी उधर प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. विशाल शर्मा ने कहा कि बोर्ड की ओर से प्रोविजनल मेरिट सूची जारी की गई है, लेकिन पुनर्मूल्यांकन और पुनर्निरीक्षण के बाद फाइनल मेरिट सूची जारी की जाएगी। उन्होंने माना कि मेधावियों की रैंकिंग में संशोधित परिणाम से असर पड़ेगा। अधिकारियों की फौज, फिर भी हो गई चूक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारियों की फौज भरी पड़ी है। इसके बावजूद बोर्ड के बारहवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में बड़ी चूक हो गई। वर्तमान में बोर्ड सचिव के पद पर एचएएस अधिकारी डॉ. विशाल शर्मा सेवारत हैं। इसके अलावा बोर्ड में 8 उप सचिव, 14 सह सचिव, एक अतिरिक्त सचिव समेत अन्य अधिकारी बोर्ड में सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश सरकार ने बीते माह बोर्ड सचिव का तबादला किया था, लेकिन बाद में सरकार ने तबादला आदेश रद्द कर दिए थे। बोर्ड में चेयरमैन का पद खाली है। वर्तमान में आईएएस अधिकारी हेमराज बैरवा के पास बोर्ड चेयरमैन का अतिरिक्त कार्यभार है। अब दूसरे स्थान पर 2 बच्चे पूर्व में दूसरे स्थान पर 3 बच्चे थे, अब 2 रह गए हैं। तीसरे स्थान पर पूर्व में 7 विद्यार्थी थे अब 2, चौथे स्थान पर पहले 3 थे अब 5, पांचवें स्थान पर पहले 4 थे अब भी 4 ही हैं। जबकि छठे स्थान पर पूर्व में 2 थे अब 1, सातवें स्थान पर पूर्व में 10 थे अब 11 हुए, आठवें स्थान पर पूर्व में 15 थे अब 11, नौवें स्थान पर पूर्व में 13 थे अब 10 रह गए, दसवें स्थान पर पूर्व में 12 विद्यार्थी थे, लेकिन संशोधन के बाद 13 हो गए हैं। कई विद्यार्थी टॉप-10 सूची से बाहर हो गए हैं।

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