हिमाचल के दृष्टिबाधित बेरोजगारों ने मंगलवार को नौकरी की मांग को लेकर सचिवालय छोटा शिमला के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने सड़क के बीचोंबीच बैठे प्रदर्शनकारियों को जबरदस्ती उठाया। इसके बाद इन्हें शिमला के कालीबाड़ी मंदिर के पास छोड़ गया है। इससे पहले दृष्टिबाधित बेरोजगार सुबह 10 बजे सचिवालय के सामने बीच सड़क पर धरने पर बैठ गए। इससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। सड़क के दोनों ओर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। पहले पुलिस ने इन्हें समझाने की कोशिश की। मगर नौकरी की मांग को लेकर 581 दिन से शिमला में धरने पर बैठे बेरोजगार नौकरी मिले बगैर धरना खत्म करने को तैयार नहीं थे। इसके बाद इन्हें जबरदस्ती बस में बिठाकर कालीबाड़ी छोड़ा गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हल्की झड़प भी हुई। दृष्टिबाधित संघ के अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, वह लगभग पौने दो साल से हड़ताल पर हैं। सचिवालय के बाहर करीब दो महीनों से धरना चल रहा है। इससे पहले कालीबाड़ी में एक साल से ज्यादा समय तक हड़ताल की, लेकिन सरकार गंभीरता से नहीं ले रही। 2 साल से बैकलॉग भर्ती की मांगः राजेश राजेश ठाकुर ने कहा, दृष्टिबाधित संघ दो साल से विभिन्न विभागों में खाली पड़े पदों पर बैकलॉग भर्ती की मांग कर रहा हैं। मगर सरकार उन्हें नौकरी देने के बजाय जानवरों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, जब तक दृष्टिहीन संघ की मांगें पूरी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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