हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के बनखंडी गांव स्थित श्री बगलामुखी मंदिर में विशेष महायज्ञ का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारतीय सेना की विजय और शत्रुओं के विनाश के लिए किया गया। भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच इस महायज्ञ में बड़ी संख्या में पंडित और श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर के महंत रजत गिरी के मार्गदर्शन में यह महायज्ञ संपन्न हुआ। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना की। उन्होंने हवन में आहुति देकर देश की अखंडता और सैनिकों की सफलता के लिए प्रार्थना की। शत्रु नाशिनी है मां बगलामुखी तंत्र शास्त्र में मां बगलामुखी को ‘शत्रु नाशिनी’ और ‘स्तंभन शक्ति’ के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि इनकी उपासना से शत्रुओं का नाश होता है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी यहां 11 दिवसीय महायज्ञ करवाया था। श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र पहनकर यज्ञ में भाग लिया। उन्होंने पीले पुष्प और हल्दी की माला का प्रयोग किया। हवन कुंड में वेदमंत्रों के साथ आहुति दी गई। वातावरण ‘जय मां बगलामुखी’ के जयघोष से गूंज उठा। महंत रजत गिरी ने कहा कि यह यज्ञ राष्ट्र रक्षा और विश्व शांति के लिए समर्पित है।

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