हिमाचल प्रदेश की वॉलीबॉल टीम के चयन के लिए हुए ट्रायल विवादों में आ गए है। एक युवा खिलाड़ी ने पारदर्शिता न बरतने के आरोप लगाते हुए कहा कि गरीब परिवार के बच्चों को कोई भी खेल नहीं खेलना चाहिए। खासकर वॉलीबॉल तो बिल्कुल भी नहीं खेलना चाहिए। यहां टेलेंट के लिए जगह नहीं है। वॉलीबॉल खिलाड़ी उदित ने वीडियो जारी कर कहा कि टीम में ज्यादातर कोच के बच्चे चुने गए हैं। इसके बाद वॉलीबॉल टीम का चयन पर सवाल उठ रहे है। दूसरे खिलाड़ियों ने भी चयन में पारदर्शिता नहीं बरतने के आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि गरीबी हार गई और सिफारिश जीत गई है। चयनकर्ताओं ने टीम में सिर्फ अपने चहेतों को चुना है। उन्होंने कहा, ट्रायल प्रक्रिया में कई खिलाड़ियों को चयन कमेटी द्वारा बिना किसी उचित मूल्यांकन के रिजेक्ट कर दिया गया। रातों रात बदल गई लिस्ट उदित ने बताया कि रात को उनका नाम लिस्ट में था, लेकिन सुबह के लिए लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया। उनके अलावा कई अन्य खिलाड़ी भी है जिनको बाहर किया गया। वह सामने आने से डर रहे हैं। सभी को दिया बराबर मौका: चयन कमेटी वहीं इस मामले में पर चयन कमेठी में शामिल अर्जुन अवार्डी संजय कुमार फोगाट ने कहा कि टीम चयन में पूरी पारदर्शिता बरती गई। उन्होंने कहा कि सबको बराबर मौका दिया गया जो बेहतरीन खिलाड़ी थे। उनका टीम में चयन हुआ है। इस ट्रायल में 70 लड़के और 45 लड़कियों ने भाग लिया था। जयपुर में होनी में नेशनल चैंपियनशिप बता दें कि सीनियर नैशनल वॉलीबॉल प्रतियोगिता 7 से 13 जनवरी तक जयपुर में होनी है। इस प्रतियोगिता के लिए हिमाचल की वॉलीबॉलटीमों के चयन के लिए ट्रायल शिमला के इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर में 26 व 27 दिसंबर को लिए गए।

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