कुल्लू जिले के दुआड़ा गांव के साथ लगती पहाड़ी में गुरुवार को आग लग गई। जिससे लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई। आग अभी भी बदस्तूर लगी हुई है जिसे बुझाने के दिन भर प्रयास किए गए, मगर रात होते ही आग एक बार फिर सुलग गई। इस आग में हजारों पेड़ जलकर नष्ट हो गए। आगजनी से दचाणी गांव को भी खतरा पैदा हो गया है। यहां रह रहे ग्रामीण लेख राज नेगी, राजू नेगी, वेद राम फतेह चंद, पुलीकृष्ण के सेब के पेड़ भी आग की चपेट में आ गए हैं। उन्होंने बताया कि उनके सेब के बगीचों में आग पहुंच गई है। कितने पेड़ इसकी चपेट में आए है इसका आकलन शुक्रवार को सुबह ही लग पाएगा । ग्रामीण जंगलात विभाग के कर्मचारियों संग आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर रात भर आग लगी रही तो ऊंचाई वाले सेब के बगीचों को तबाह कर सकती है। वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड मनोज राणा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के साथ मिलकर दिन में आग पर काबू पा लिया गया था, मगर रात होते ही आग एक बार फिर सुलग गई है। हर साल लगती है आग
इस स्थान पर हर साल आग लगती है मगर वन विभाग द्वारा आग से बचाव के अब तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस जंगल में अधिकतर चील के पेड़ लगे हुए जहां हर वर्ष आग लगती है। कुल्लू-मनाली घूमने आने वाले पर्यटक भी हैरान रहते हैं कि बुरी तरह जल रहे जंगल की सुध लेने वाला कोई नहीं है। युवक मंडल द्वारा लगाए गए देवदार के वृक्ष राख
युवक मंडल दुआड़ा के सदस्यों ने पिछले तीन सालों में इस स्थान पर अनेक देवदार के वृक्ष रोपित किए थे। इस आगजनी की वजह से अधिकतर जलकर राख हो गए हैं। युवक मंडल के सदस्यों ने बताया कि युवक मंडल द्वारा इस स्थान पर लगाए हुए अधिकतर देवदार के वृक्ष भी आग की भेंट चढ़ गए हैं। बड़ागढ़ के जंगल हो रहे तबाह आगजनी की घटनाएं होने से बड़ागढ़ के जंगल तबाह हो रहे हैं । हर वर्ष वन विभाग व स्थानीय लोग मिलकर यहां पौधा रोपण करते हैं मगर हर वर्ष शरारती तत्वों द्वारा जंगल में आग लगा दी जाती है । स्थानीय जनता ने विभाग तथा सरकार से मांग की है कि आग की घटनाओं से निपटने के लिए कठोर नियम बनाए जाएं । आग लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए जिसमें सजा का भी प्रावधान हो ।

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