शिमला जिला के रामपुर पीजी कॉलेज की एसएफआई इकाई ने सोमवार को एसडीएम रामपुर निशांत तोमर के माध्यम से डीसी शिमला को ज्ञापन भेजा। एसएफआई जिलाध्यक्ष राहुल विद्यार्थी ने कहा कि एसएफआई बीते लंबे समय से सभी कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में जनवादी तरीके से लिंग संवेदनशील कमेटी गठन को लेकर आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन यह आंदोलन तब बढ़ा जब बीते 19 सितंबर को संजोली कॉलेज में एक लड़की के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया। प्रशासन द्वारा कक्षाओं का किया गया बहिष्कार
एसएफआई पीड़िता के साथ प्रशासन से जांच की मांग करती है, तो प्रशासन द्वारा हवाला दिया जाता है कि वूमेन सैल में बैठक के जरिए मामले की निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी। अगले दिन 20 सितंबर को जब एसएफआई का प्रतिनिधिमंडल कॉलेज प्रशासन से मिलता है, तो प्रशासन ने एसएफआई के प्रति नकारात्मक व्यवहार दिखाते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे को और अधिक गंभीर बनाया गया तो हम कक्षाओं का बहिष्कार कर देंगे। जिसके बाद कक्षाओं का बहिष्कार गया और अनौपचारिक तरीके से महाविद्यालय में अवकाश घोषित किया गया। वहीं जब एसएफआई प्रदर्शन करने उतरी तो प्रशासन द्वारा छात्रों के साथ हाथापाई की गई। मामले को दबाने के लिए हर तरह के हथकंडे अमल में लाए जाते हैं। वहीं मामले को लेकर महिला प्रधानाचार्या भी चुप्पी साधे हुए हैं। 6 कार्यकर्ताओं को महाविद्यालय से किया गया निष्कासित
कॉलेज प्रशासन ने एसएफआई के 6 कार्यकर्ताओं को महाविद्यालय से अनिश्चित काल के लिए निष्कासित किया है। 23 सितंबर को जब एसएफआई की लड़कियां कॉलेज में पर्चा वितरण कर रही थी, तो उन्हें कक्षाओं में ले जाकर प्रशासन के कुछ लोगों द्वारा मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। छात्राओं पर दबाव डाला जाता है कि वे एसएफआई की गतिविधियों से दूर रहें और न ही उनसे बात करें। इकाई ने जिला प्रशासन से मांग की है कि महाविद्यालय की परिस्थिति को देखते हुए हस्तक्षेप करें और निष्कासित छात्रों का निष्कासन जल्द रद्द हो। इस मौके पर मुस्कान, अंशु, रमाकांत, पल्लवी, प्रीति मौजूद रहे।