हिमाचल के दो युवा नेता, PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह और सांसद कंगना रनोट दोनों अपनी-अपनी पार्टी के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं। इन दोनों नेताओं के हालिया विवादित बयान से कांग्रेस-भाजपा बेक-फुट पर आई हैं। हरियाणा और जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में नुकसान की आशंका देखते हुए दोनों पार्टियों को इनके बयान से किनारा करना पड़ा। कांग्रेस को मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान से जम्मू कश्मीर और हरियाणा, दोनों राज्यों में नुकसान का डर है। विक्रमादित्य ने चार दिन पहले पार्टी लाइन से हटकर वक्फ बोर्ड में सुधार की बात कही। तीन दिन पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तर्ज पर भोजनालय में आई-कार्ड अनिवार्य करने की बात कही। इसके बाद देशभर में हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर यूपी की योगी सरकार के मॉडल को अपनाने के आरोप लगने शुरू हुए। इससे कांग्रेस बेकफुट में आ गई, क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कावड़ यात्रा के दौरान दुकानों में आई-कार्ड लगाना अनिवार्य किया था, तब कांग्रेस ने योगी सरकार के इस निर्णय का विरोध किया था। अब हिमाचल में कांग्रेस सरकार के मंत्री आई-कार्ड को लेकर यूपी मॉडल को अपनाने की बात कह रहे हैं। हालांकि कांग्रेस सरकार ने मंत्री के इस बयान का खंडन कर दिया और कहा, कि अभी ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ। वक्फ बोर्ड पर भी पार्टी लाइन से हटकर बयान भोजनालय में आई-कार्ड से पहले विक्रमादित्य सिंह ने वक्फ बोर्ड में बदलाव की जरूरत बताई थी। देश में कांग्रेस इसका विरोध कर रही है और हिमाचल में कांग्रेस के मंत्री इसकी पैरवी कर रहे हैं। दरअसल, मोदी सरकार वक्फ बोर्ड में बदलाव के लिए लोकसभा में विधेयक लाने की तैयारी में है। कांग्रेस इस विधेयक के खिलाफ बोल रही है। हिमाचल के मंत्री वक्फ बोर्ड में बदलाव के पक्षधर है। राजीव शुक्ला ने दी सफाई विक्रमादित्य के बयान पर हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला को भी सफाई देनी पड़ी। उन्होंने कहा, इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। हिमाचल सरकार का ऐसा कोई आदेश नहीं है। इसलिए यूपी से तुलना करना गलत है। वहीं हिमाचल सरकार में CPS संजय अवस्थी ने विक्रमादित्य का नाम लिए बगैर कहा, जब जिम्मेदारी बड़ी हो तो सोच भी बड़ी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्री का बयान उनका निजी है। सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं है। कंगना के बयान ने BJP को चिंता में डाला उधर, कंगना ने भी चार दिन पहले मनाली में BJP की चिंता बढ़ाने वाला बयान दिया। कंगना ने अपील की कि तीन कृषि कानूनों को वापस लाने की किसान खुद प्रधानमंत्री से अपील करें। इन कृषि कानूनों को वापस कराने के लिए लड़े गए आंदोलन के दौरान लगभग 700 किसानों की जान चली गई। कंगना के इस बयान से किसान भड़क गए और खासकर हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान का डर है। फिर BJP हाईकमान की फटकार के बाद कंगना ने अपने बयान पर खेद जताया। कंगना को भी पार्टी हाईकमान दे चुकी नसीहत कंगना को पार्टी हाईकमान पहले भी संवेदनशील मुद्दों पर बात नहीं करने की नसीहत दे चुकी और पार्टी ने स्पष्ट कर रखा है कि कंगना ऐसे बयान को अधिकृत नहीं है।कंगना फिर भी विवादित बयान देने से पीछे नहीं हटती। विक्रमादित्य सिंह भी कई मामलों में पार्टी लाइन से हटकर बात करते रहे हैं। इससे दोनों विवादों में भी घिर रहे हैं।

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