हिमाचल प्रदेश में पेंशनर्स ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। मंगलवार को राजधानी शिमला में पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने संगठन की शिमला इकाई की बैठक की। 20 सितंबर को प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदेश भर में सभी जिला मुख्यालयों व स्थानीय स्तर पर जगह-जगह प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष आत्माराम शर्मा ने कहा कि पेंशनर्स एसोसिएशन ने जुलाई माह में हुई राज्यस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री से 15 सितंबर तक मिलने का समय मांगा था। लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया जिसके बाद पेंशनर एसोसिएशन ने 20 सितंबर को प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि 20 तारीख को किन्नौर से लेकर सिरमौर तक लाहौल से लेकर चंबा तक पूरे प्रदेश भर में प्रदर्शन किए जाएंगे और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। जेसीसी के गठन की मांग आत्माराम शर्मा ने बताया कि पेंशनर्स लंबे समय से प्रदेश सरकार से जीसीसी के गठन की मांग कर रहा है और पेंशनर्स को उसमें शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि जेसीसी पेंशनरों के मुद्दे के लिए महत्वपूर्ण मंच है परंतु वर्तमान सरकार ने अभी तक जेसीसी गठन नहीं किया है। जेसीसी में वित्तीय मुद्दों के अलावा प्रशासनिक मुद्दों पर भी पेंशनर्स की चर्चा होती है आत्माराम शर्मा ने कहा कि सरकार ने ना उन्हें वार्ता के लिए बुलाया और जेसीसी के गठन का आश्वासन दिया है। ऐसे में उन्होंने सड़क पर उतरने का फैसला कर दिया है। क्या है पेंशनर्स की मांगे? उन्होंने ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पेनशरों के मेडिकल बिल काफी समय से लंबित पड़े हैं। जनवरी 2016 से लेकर दिसंबर 2021 तक सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को अभी तक पेंशन के पूरे लाभ नहीं मिले हैं। कम्यूटेशन की राशि कटौती 10 साल के बाद बंद की जाए। प्रदेश सरकार सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है। जिसके चलते पेंशनरों में रोष है। उन्होंने कहा कि छठे वेतन आयोग के एरियर का भुगतान, डीए की किस्त, मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं होना व जेसीसी के गठन की मांग पेंशनर काफी समय से कर रहे हैं। लेकिन मांगे मानना तो दूर सरकार पेंशनरों को बातचीत के लिए भी नहीं बुला रही है। इसलिए पेंशनर्स ने सड़को पर उतरने का लिया है।

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