हिमाचल की राजधानी संजौली के बाद अब शिमला के उप नगर कसुम्पटी में भी मस्जिद गिराने की मांग पर लोग अड़ गए हैं। इसे लेकर आज कसुम्पटी वासियों का एक प्रतिनिधिमंडल नगर निगम (MC) आयुक्त भूपेंद्र अत्री से मिलने जा रहा है, जो मस्जिद के अवैध निर्माण को गिराने की मांग करेंगे। MC आयुक्त कोर्ट एक साल पहले ही कसुम्पटी मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने के आदेश सुना चुका है। मगर मुस्लिम समुदाय ने MC आयुक्त के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दे रखी है। अभी यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। बाजार में असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया: रचना कसुम्पटी वार्ड की पार्षद रचना शर्मा ने कहा कि हर शुक्रवार को यहां इस छोटे से ढांचे में 100 से ज्यादा लोग नमाज पढ़ने आते हैं, जिस जगह लोग नमाज पढ़ने पहुंचते हैं, वह जगह मकान के लिए दी गई थी। अब यहां अवैध रूप से मस्जिद चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले लोगों की वजह से बाज़ार में असुरक्षा का माहौल पैदा होता है। नमाज के समय यहां से चलना मुश्किल हो जाता है। इसलिए इस मस्जिद को जल्द गिराया जाए। यह मांग MC आयुक्त से की जाएगी। 4-5 सालों से मस्जिद में बड़ी गतिविधियां शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा ने कहा कि पूर्व में यहां एक मंजिल का ढारा सा होता था, लेकिन अब दो मंजिला मस्जिद बना दी गई है। उन्होंने कहा, मस्जिद में अंदर ही अंदर ही कंस्ट्रक्शन का कार्य चला हुआ है। यहां से एक किलोमीटर आगे मस्जिद है। ऐसे में कसुम्पटी में मस्जिद की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा, नमाज के समय यहां से चलना मुश्किल हो जाता है। बाज़ार में न्यूसेंस क्रिएट हो रही है। उन्होंने इस अवैध मस्जिद को तुंरत हटाने की मांग की है। पूर्व मेयर ने कहा कि यह जमीन वफ्फ बोर्ड ने सदीक मोहम्मद की घरवाली मुमताज बेगम के नाम पर लीज पर दी था। लेकिन उनके बच्चों ने इसे बाहर से आने वाले लोगों को दे दिया। जिसके बाद से यहां बाहर के लोगों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई। आजादी से पहले की बनी मस्जिद: कुतुबुद्दीन वक्फ बोर्ड के स्टेट ऑफिसर कुतुबुद्दीन ने दावा किया कि कसुम्पटी क्षेत्र में वफ्फ बोर्ड की जमीन है। उनके पास इसका राजस्व रिकॉर्ड भी है। कसुम्पटी में बनी मस्जिद आजादी से पहले की है और यहां जमीन या मस्जिद पर कोई विवाद नहीं है। सिर्फ कुछ निर्माण को नगर निगम कोर्ट ने हटाने के आदेश दिए है, जिससे संबंधित मामला अब सेशन कोर्ट में लंबित है। अब सिलसिलेवार पढ़िए कैसे पैदा हुआ मस्जिद विवाद … दरअसल, बीते 31 अगस्त को शिमला के मैहली में दो गुटों के बीच लड़ाई हुई। इसके आरोपी संजौली मस्जिद में छिप गए। पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। 1 सितंबर को हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों में संजौली मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। 5 सितंबर को संजौली और चौड़ा मैदान में फिर प्रदर्शन कर अवैध मस्जिद गिराने की मांग उठी। इसी दिन कसुम्पटी में भी अवैध मस्जिद को तोड़ने की मांग को लेकर स्थानीय लोगं ने प्रदर्शन किया। 11 सितंबर को संजौली-ढली में उग्र प्रदर्शन हुआ। पुलिस को हल्का बल प्रयोग और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बाद प्रदेशभर में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर और हिंदू संगठनों ने अलग अलग शहरों में रोष रैली निकाल कर अवैध मस्जिद को तोड़ने और बाहर से आने वाले लोगों की वैरिफिकेशन की मांग की। बीते शनिवार को मंडी नगर निगम कोर्ट ने भी जेल रोड़ पर बनी अवैध मस्जिद को 30 दिन के भीतर तोड़ने के आदेश दिए। बीते कल सोलन में इसी मामले में प्रदर्शन कर रहे कुछ व्यापारी आपस में भिड़ गए। मुस्लिम समुदाय ने नारे पर जताई आपत्ति उधर, सिरमौर के पांवटा साहिब में मुस्लिम समुदाय ने कुछ दिन पहले हिंदू जागरण मंच द्वारा मस्जिद के बाहर की गई नारेबाजी पर आपत्ति जताते हुए SDM को ज्ञापन सौंपा और इस मामले में संज्ञान लेने की मांग की।

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