रामबिलास शर्मा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनका 55 साल का संघर्ष रहा है। इस दौरान मैंने डंडा नहीं बदला, झंडा नहीं बदला और एजेंडा नहीं बदला। आपको मेरे इमान की कसम, मेरे जयराम भगवान की कसम, आप भावुक होकर मुझे कमजोर न करें, नहीं तो मैं टूट जाऊंगा।


रामबिलास शर्मा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनका 55 साल का संघर्ष रहा है। इस दौरान मैंने डंडा नहीं बदला, झंडा नहीं बदला और एजेंडा नहीं बदला। आपको मेरे इमान की कसम, मेरे जयराम भगवान की कसम, आप भावुक होकर मुझे कमजोर न करें, नहीं तो मैं टूट जाऊंगा। 

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