हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और डिप्टी सीएम पर पूर्व उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने बड़ा हमला किया है। पूर्व मंत्री ने सीएम सुक्खू पर प्रदेश के विकास के लिए आया पैसा नादौन में खर्च करने का आरोप लगाया है। वहीं उन्होंने डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के विभाग में भी 132 करोड़ के एक टेंडर में गड़बड़ी का दावा किया है। पूर्व उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर ने शिमला में सीएम सुक्खू व डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा जलशक्ति विभाग में टेंडर में घोटाले के बड़े आरोप लगाए है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिला के बड़सर विधानसभा में व्यास नदी के स्त्रोत से एक पानी की स्कीम बननी थी, जिसकी लागत 200 करोड़ थी। सरकार ने इसका टेंडर आवंटित कर दिया था, लेकिन अधिकारियों को टेंडर आवंटित करने के बाद मालूम पड़ा कि व्यास नदी का स्त्रोत दूर है और उससे नजदीक सतलुज नदी का स्त्रोत है प्रोजेक्ट को सतलुज पर लगाया जा सकता है। इसके पहले किए टेंडर को रद्द कर दिया गया। और प्रोजेक्ट का पूरा का पूरा प्रारूप और डीपीआर बदल दिया और 131 करोड़ की नई डीपीआर तैयार करके इस प्रोजेक्ट को बिना किसी टेंडर के उसी ठेकेदार को सौंप दिया । एक अधिकारी ने सरकार को लिखा दो पन्नो का पत्र विक्रम ठाकुर ने दावा किया है बिना टेंडर के उसी ठेकेदार और कंपनी को प्रोजेक्ट देने पर टेंडर आवंटित करने वाली कमेटी के सदस्य अधिकारी ने सरकार को दो पन्नों का पत्र लिखा, कि टेंडर रद्द करने के बाद दोबार टेंडर करने के लिए आवेदन लेने होते हैं, लेकिन अधिकारी की असहमति के बावजूद इस पर कार्रवाई नहीं हुई। टेंडर की हो विजिलेंस जांच, नहीं तो बुलानी पड़ेगी ईडी उन्होंने कहा मुख्यमंत्री व सरकार को मामले में ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को इस टेंडर की विजिलेंस जांच करानी चाहिए, अगर सरकार विजिलेंस जांच नहीं कराती तो मजबूरन उन्हें मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी को देना पड़ेगा। पांच शहरों के सीवरेज योजना के टेंडर में भी हुई गड़बड़ी बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया है प्रदेश के पांच शहरों की सीवरेज की योजना के लिए आए प्रोजेक्ट के पैसे के टेंडर में भी घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट को लेने के लिए किसी भी कंपनी को फाइनेंशियल और तकनीकी बिड डालनी होती है। प्रोजेक्ट को लेने के लिए पहले पांच कंपनियों ने आवेदन किया था। लेकिन दो कंपनियों के पास फाइनेंशियल बिड न होने कारण उनके आवेदन रिजेक्ट कर दिए, परंतु बाद में तीन कंपनियों बिना फाइनेंशियल बिड के तकनीकी बिड के आधार पर ही टेंडर आवंटित कर दिया। इससे सरकार को करोड़ों का चूना लगा है, सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। पूरे प्रदेश के लिए आया 200 करोड़ नादौन में हो गया खर्च पूर्व उद्योग मंत्री ने आरोप लगाया है कि स्पेशल अस्सिटेंस के तहत हिमाचल प्रदेश में पेयजल योजनाओं के लिए केंद्र से 200 करोड़ स्वीकृत हुए थे । लेकिन यह सारा पैसा सीएम सुक्खू ने अपने विधानसभा क्षेत्र नादौन ही ले गए है। उन्होंने 60- 60 करोड़ के तीन टेंडर नादौन विधानसभा में खर्च हुए हैं, जबकि मात्र 20 करोड़ का एक अन्य टेंडर हुआ है। बिक्रम सिंह ने पूरे मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि आने वाले सत्र में इन पर विधानसभा में सरकार से जवाब मांगेंगे और सरकार के काले कारनामों को प्रदेश की जनता के सामने लाएंगे।

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