शिमला के कार्ट रोड पर पुराना बस अड्डा के गुरुद्वारा के पास बीती रात में लैंडस्लाइड हो गया। इससे कार्ट रोड को खतरा पैदा हो गया है। सड़क का बड़ा हिस्सा लैंडस्लाइड में टूट गया है। इससे ट्रैफिक बाधित हुआ है और एक तरफ वाहन भेजे जा रहे है। कार्ट रोड शिमला शहर की लाइफ लाइन है। ऐसे में यहां दोबारा लैंडस्लाइड होता है तो इससे शिमला शहर की रफ्तार पूरी तरह थम सकती है। अभी भी सड़क को खतरे की वजह से यहां रुक रुक कर वाहनों की आवाजाही हो रही है। गुरुद्वारा के पास नई पार्किंग बनाने का काम चल रहा था। इससे यहां लैंडस्लाइड हुआ है। गुरुद्वारा के चंद मीटर की दूरी पर लोकल बस स्टैंड है, जहां से मैहली, पंथाघाटी, न्यू शिमला, बीसीएस, नवबहार, ढली, संजौली, छोटा शिमला इत्यादि उपनगरों को बसे चलती है। कृष्णानगर में एक दर्जन घरों को खतरा वहीं मानसून शुरू होते ही कृष्णानगर के लोगों की चिंताएं बढ़ गई है। बीते साल कृष्णानगर में भारी बारिश के दौरान स्लाटर हाउस सहित 5 मकान गिर गए थे। स्लाटर हाउस गिरने से दो लोगों की मौत भी हुई थी। उस दौरान एक दर्जन से ज्यादा मकान यहां खाली कराए गए थे। हालांकि इनमें अभी तक कोई नहीं रहता। मगर बरसात शुरू होते ही इन मकानों पर खतरा मंडरा रहा है। यदि अगली पंक्ति के खाली कराए गए मकान गिरते है तो इससे पिछली पंक्ति के मकानों को भी खतरा पैदा हो जाएगा। इस खतरे को भांपते हुए स्थानीय प्रशासन ने खतरनाक हो चुके घरों के आगे तिरपाल लगा दी है। एक साल से प्रशासन के कान पर नहीं रेंग रही जूं: पार्षद स्थानीय पार्षद बिटू पाना ने बताया कि वह एक साल से खतरे की जद में आए मकान को बचाने के लिए डंगा लगाने की मांग कर रहे है। मगर नगर निगम और जिला प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। उन्होंने बताया कि भारी बारिश की सूरत में कृष्णानगर में कई मकानों को नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि बेशक कुछ मकान पहले से खाली कर रखे है, मगर इनके गिरने से पिछले घरों को भी खतरा पैदा हो जाएगा।

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