‘खुद को हिमाचल की बेटी बताने वाली कंगना रनोट ने राज्य की ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए सरकार से प्रतिदिन के हिसाब से 45 लाख रुपए मांगे। ठहरने, खाने-पीने, ट्रैवलिंग वगैरह के बाकी खर्च अलग से होने थे। यह सब कुछ ऑन रिकॉर्ड है। सारे खर्च मिलाकर एक दिन का एक करोड़ रुपए के आसपास बनता था। उनका हिमाचल के लोगों से कोई जुड़ाव नहीं है।’ यह दावा मंडी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार और हिमाचल के पीब्ल्यूडी मिनिस्टर विक्रमादित्य सिंह ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में किया। मंडी लोकसभा सीट से हिमाचल के 6 बार सीएम रह चुके वीरभद्र सिंह और उनके परिवार का गहरा नाता है। विक्रमादित्य का ये पहला लोकसभा चुनाव है और उनका मुकाबला BJP कैंडिडेट कंगना रनोट से है। फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमा चुकी कंगना का भी ये पहला चुनाव है। मंडी संसदीय हलके में दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। पढ़िए विक्रमादित्य सिंह का पूरा इंटरव्यू… भास्कर : प्रचार कैसा चल रहा है?
विक्रमादित्य : प्रचार अच्छा चल रहा है। लोगों का प्यार और आशीर्वाद मिल रहा है। मुझे विश्वास है कि इस बार मंडी संसदीय क्षेत्र के लोगों की जीत होगी। हम यहां के विकास कार्यों को और ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेंगे। भास्कर : मंडी संसदीय क्षेत्र में पिछले साल बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। उसके बाद राज्य सरकार ने राहत कार्य चलाए। अब इस इलाके के लिए आपका विजन क्या है?
विक्रमादित्य : हमारा विजन साफ है। यहां की क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करवाना है। नई टनलों का निर्माण कराना है। यहां 2 जगह-भूभू और जलोड़ी- में टनल बहुत जरूरी है। हमने ये मामला केंद्र में भी उठाया है। कुल्लू में मेडिकल कॉलेज बनाने का वादा पूरा करेंगे। भास्कर : मंडी एक तरह से आपके परिवार की पारंपरिक सीट रही है। पिता वीरभद्र सिंह की लीगेसी का कितना फायदा मिल रहा है? या इसका कोई प्रेशर फील होता है?
विक्रमादित्य: हम बिल्कुल फ्री माइंड से इलेक्शन लड़ रहे हैं। लोगों से मिल रहे हैं। उनका आशीर्वाद ले रहे हैं। वीरभद्र सिंह जी का नाम हमारे साथ है। लोगों में विश्वास है। हम नई उम्मीद और नई सोच लेकर आगे जा रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हम यहां जीतेंगे। भास्कर : BJP ने आपके सामने फिल्म अभिनेत्री कंगना रनोट को उतारा है। उन्हें कितना सीरियस कैंडिडेट मानते हैं?
विक्रमादित्य : ये भारतीय जनता पार्टी की मजबूरी है। मंडी सीट से ही निर्दलीय चुनाव लड़ रहे एक उम्मीदवार तो RSS के प्रचारक रहे हैं। वो खुद कह चुके हैं कि कंगना को टिकट देने से भाजपा के नेता और कार्यकर्ता आहत हैं। पैराशूट के तौर पर एक अभिनेता को मुंबई से यहां उतारा गया। क्या BJP में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था कि जो मंडी से चुनाव लड़ सकता था। जिसका लोगों के साथ जुड़ाव न हो, जिसने कभी कोई सहयोग न किया हो, ऐसे शख्स को टिकट क्यों दिया गया? ये बड़ा प्रश्न तो आज भाजपा के अंदर ही खड़ा हो गया है। भास्कर : आप बार-बार कहते रहे हैं कि हिमाचल की ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए कंगना रनोट ने 45 लाख रुपए मांगे। आपके इस दावे का आधार क्या है?
विक्रमादित्य : हमारे दावे का आधार ये है कि ये चीजें सच में हुई हैं और सबकुछ ऑन रिकॉर्ड है। हिमाचल के डायरेक्टर जब मिलने गए तो कंगना रनोट ने खुद उनसे कहा कि उन्हें हर दिन के 45 लाख रुपए चाहिए। इसके अलावा खाने-पीने, ट्रैवलिंग और बाकी क्रू वगैरह के खर्चे अलग से होंगे। ये सबकुछ मिलाकर एक दिन का एक करोड़ रुपए के आसपास बैठ रहा था। जाहिर है कि इतना बड़ा खर्चा राज्य सरकार अफॉर्ड नहीं कर सकती थी। एक तरफ वो खुद को हिमाचल की बेटी बताती हैं और दूसरी तरफ हिमाचल का ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए सरकार से रोज के 45 लाख रुपए मांगती हैं तो इसका कोई औचित्य नहीं। भास्कर : कंगना का कहना है कि उनके सामने चुनाव लड़ने से विक्रमादित्य सिंह का नाम देश का बच्चा-बच्चा जान गया है। यानि उनके कारण आप देशभर में मशहूर हो गए है? क्या कहना चाहेंगे?
विक्रमादित्य: मुझे मशहूर होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसी मशहूरियत उन्हें ही मुबारक। हमें ऐसी मशहूरियत नहीं चाहिए। मैं जहां हूं, वहीं खुश हूं। भास्कर : आप कहते हैं कि कंगना जीतने के बाद मुंबई चली जाएंगी जबकि उनका कहना है कि वो जीतीं तो फिल्में छोड़ देंगी। मंडी के लोग किसके दावे पर भरोसा करें?
विक्रमादित्य : उन्होंने (कंगना ने) ऑन रिकॉर्ड कहा है कि अभी मेरे प्रोजेक्ट बचे हुए हैं और 5 से 6 फिल्में पाइपलाइन में हैं, जिन्हें पूरा करना है। अब अगर उन्हें ये फिल्में पूरी करनी हैं तो फिर वह जाएंगी। यहां पर बैठकर तो होगा नहीं। ऐसे में लोगों की सुध कौन लेगा? पिछले साल इतनी बड़ी आपदा आई लेकिन उसमें वह नहीं आई। लोगों से कनेक्ट नहीं रखा। इसलिए लोगों ने पूरा मन बना लिया है कि उन्हें वापस मुंबई उनकी फिल्मनगरी में भेजना है। भास्कर : आप वीरभद्र सिंह की लीगेसी की बात करते हैं जबकि उनके समर्थक एक-एक कर कांग्रेस छोड़ रहे हैं। आपके हिसाब से ये खलबली क्यों मची है? कांग्रेस छोड़ने वालों से क्या कहना चाहेंगे?
विक्रमादित्य : कुछ लोग गए हैं, वह किस महत्वाकांक्षा से गए हैं, इसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता। पार्टी के जो मूल रूप से कार्यकर्ता हैं, वह हमारे साथ मजबूती से खड़े हैं। जो लोग गए हैं, मैं उनके बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। भास्कर : विक्रमादित्य सिंह को क्या पसंद है। स्टेट की पॉलिटिक्स में रहकर हिमाचल के लिए काम करना या केंद्र की राजनीति में जाकर हिमाचल के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रोजेक्ट्स लाना?
विक्रमादित्य : दोनों तरीकों से सेवा प्रदेश की ही होनी है। चाहे वो दिल्ली के माध्यम से हो रही हो या फिर यहां से हो। वोट हिमाचल के लोगों ने देने हैं। मुद्दे हिमाचल के ही उठने हैं। विकास हिमाचल का ही होना है। इसलिए ये फर्क नहीं पड़ता कि आप विधानसभा में हैं या लोकसभा में। मुद्दा यह है कि हमने विकास करवाना है। इसका जरिया विधानसभा और लोकसभा चुनाव हैं। हम जहां भी रहेंगे, हिमाचल के हर कोने का विकास करने में सहयोग करते रहेंगे। भास्कर : राज्यसभा चुनाव के बाद हिमाचल में जो कुछ हुआ, विरोधी उसके पीछे कहीं न कहीं होलीलॉज (वीरभद्र फैमिली का निजी आवास) की भूमिका बताते हैं। ऐसे लोगों को क्या जवाब देना चाहेंगे?
विक्रमादित्य : मैंने इसमें पहले भी साफ किया है कि जो चले गए, वो चले गए। वह दूध पीते बच्चे तो थे नहीं। वह मुझसे उम्र में बड़े थे। राजनीतिक कद में भी बड़े थे। उन्होंने अपना मन बनाया और चले गए। हम जहां हैं, वहीं खड़े हैं। मुद्दो की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें लोगों ने इसलिए जिताया क्योंकि हमने हमेशा प्रदेश के मुद्दों की बात की है। विकास की बात की है। अब भी हम विकास के नाम पर इलेक्शन लड़ रहे हैं और इसे जीतेंगे। भास्कर: विरोधियों का मंडी से लोकसभा चुनाव लड़ाने का मकसद कहीं आपको स्टेट की राजनीति से दूर करना तो नहीं है?
विक्रमादित्य : अब कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। अगर मैं ये चुनाव नहीं लड़ता तो यही लोग कहते कि मैदान से भाग गया। अब लड़ रहा हूं तो कह रहे हैं कि षड्यंत्र है। ऐसे लोगों को तो कुछ न कुछ कहना ही है। मैंने पार्टी टिकट के लिए अप्लाई नहीं किया था, लेकिन फिर भी केंद्रीय नेतृत्व ने मुझे टिकट दिया। इसके लिए मैं हाईकमान का धन्यवाद करता हूं। मैं हाईकमान से वादा करके आया हूं कि 4 जून को हम मंडी सीट कांग्रेस की झोली में डालेंगे और I.N.D.I.A. अलायंस में मंडी सीट का बहुत बड़ा योगदान होगा।