हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के मुल्थान गांव में तबाही का कारण बने लबांडग हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का निर्माण इलेक्टोरल बांड में सबसे ज्यादा चंदा देने वाली मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रॉस्ट्रक्चर लिमिटेड ने किया है। इस कंपनी की लापरवाही की वजह से मुल्थान गांव तबाह हो गया है। लगभग 20 परिवारों के 130 से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। लोग होटल व रिश्तेदारों के यहां ठहरे हुए हैं। बरसात से पहले ही गांव को खाली कराया गया है। डेढ़ से दो महीने बाद बरसात शुरू होनी है। इससे लोग अभी से दहशत में आ गए हैं। बीते 10 मई को प्रोजेक्ट का पेनस्टॉक फटने से मुल्थान बाजार में लगभग 40 दुकानों, आठ से 10 घरों, 30 से अधिक किसानों की 50 बीघा से ज्यादा जमीन, एक दर्जन गाड़ियों सहित पुलिस चौकी इत्यादि को नुकसान हुआ है। हालांकि कंपनी सभी प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने को तैयार हो गई है। आज से ही मुआवजे का वितरण शुरू कर दिया गया है। मगर बिन बरसात के ही इस तरह की तबाही भविष्य के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है, क्योंकि लबांडग प्रोजेक्ट की टनल में पहली बार पानी का रिसाव नहीं हुआ है। इससे पहले भी टनल में रिसाव के कारण मुल्थान बाजार में पानी व मलबा आया है। बरसात में तबाही मचा सकता है प्रोजेक्ट बरसात में इसकी पुनरावृति हुई तो यह प्रोजेक्ट बड़ी तबाही का कारण बन सकता है। अब इस प्रोजेक्ट के निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि इलेक्टोरल बांड में सबसे ज्यादा चंदा देने वाली कंपनी ने बिजली का उत्पादन उद्घाटन से पहले ही शुरू कर दिया था। कंपनी ने नुकसान की भरपाई की शुरू: संजीव मुल्थान पंचायत के उप प्रधान संजीव ने बताया कि लबांडग प्रोजेक्ट के कारण भारी तबाही हुई है। मगर अब हालात सामान्य हो गए हैं। उन्होंने बताया कि बरसात में खतरा अभी भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने नुकसान की भरपाई शुरू कर दी है। उन्होंने प्रोजेक्ट में लिए बनाई गई टनल का नए सीरे से निर्माण करने की मांग की है ताकि भविष्य में पानी का रिसाव न हो। SDM बैजनाथ डीसी ठाकुर ने बताया कि कंपनी ने प्रभावित परिवारों को मुआवजे का आवंटन शुरू कर दिया है। इस बीच ऊर्जा विभाग ने भी जांच बिठा दी है। निर्माण के वक्त क्वालिटी का नहीं रखा ध्यान: MLA बैजनाथ के स्थानीय विधायक एवं CPS किशोरी लाल ने बताया कि प्रोजेक्ट के निर्माण में क्वालिटी का ध्यान नहीं रखा गया। कंपनी ने ट्रायल की परमिशन मांगी और बिजली का उत्पादन शुरू किया गया। इससे मुल्थान के साथ साथ तरमेर गांव पर भी संकट मंडरा रहा है। बरसात में यह प्रोजेक्ट क्षेत्र में बड़ी तबाही ला सकता है। किशोरी लाल ने बताया कि उन्होंने जांच के आदेश दिए है। इनक्वायिरी रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मेघा इंजीनियरिंग ने इलेक्टोरल बांड में 966 करोड़ का चंदा दिया इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य 2003 में केयू हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट कंपनी ने शुरू किया। मगर 2014-15 के आसपास यह प्रोजेक्ट मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया। इस कंपनी ने इलेक्टोरल बांड के जरिए 966 करोड़ रुपए दिए है। इससे से ज्यादा फ्यूचर गेमिंग और होटल सर्विसेज ने 1,368 करोड़ रुपए इलेक्टोरल बांड में दिए है। मेघा इंजीनियरिंग दूसरे नंबर पर है। 10 को फटा था पेनस्टॉक बीते 10 मई को प्रोजेक्ट का पेनस्टॉक फटने के बड़े बड़े पत्थर, मलबा, पेड़ वगैरह बहकर मुल्थान बाजार पहुंच गए थे। इससे किसानों की जमीन को भारी नुकसान हुआ। बाजार में अभी भी चार से छह फीट तक मलबे के ढेर लगे हुए है, जिन्हें कंपनी हटाने में जुटी हुई है।

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