हिमाचल के तीन निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे पर स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया आज कोई फैसला कर सकते हैं। दरअसल, स्पीकर ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की याचिका पर निर्दलीय विधायकों को विधानसभा में पेश होने और नोटिस का जवाब देने के निर्देश दे रखे हैं। हालांकि पिछली सुनवाई में तीनों विधायक स्पीकर के सामने हाजिर नहीं हुए। हिमाचल हाईकोर्ट की डबल बैंच ने भी इनके इस्तीफे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। डबल बैंच के डायसेंटिंग व्यू के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बैंच अब दोबारा से इस मामले को सुनेगी। मगर विधानसभा स्पीकर आज राजस्व मंत्री की याचिका पर सुनवाई करेंगे। राजस्व मंत्री ने 25 अप्रैल को ही स्पीकर को एक याचिका दी। इसमे मंत्री ने कहा था कि, तीनों निर्दलीय विधायकों ने इस्तीफा स्वीकार होने से पहले ही BJP ज्वाइन की है। इनके खिलाफ एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। इन्हें डिस्क्वालीफाइ किया जाए। इस याचिका पर फैसला देने से पहले स्पीकर ने इन्हें आज विधानसभा में पेश होने को कहा है। इन विधायकों ने 15 महीने में दे दिया इस्तीफा देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, नालागढ़ से केएल ठाकुर और हमीरपुर से आशीष शर्मा ने बीते 22 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया। 23 मार्च को इन्होंने दिल्ली में BJP ज्वाइन की। इसके बाद राजस्व मंत्री और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पीकर को एक याचिका दी, जिसमें इन्होंने शंका जाहिर की कि 5 साल के लिए चुने गए विधायकों ने आखिर 15 महीने में ही रिजाइन क्यों किया? 10 अप्रैल को स्पीकर के नोटिस का दे चुके जवाब शिकायत में कहा गया कि, BJP ने इन्हें हेलीकॉप्टर से शिमला पहुंचाया। यही नहीं इस्तीफा देते वक्त भाजपा नेता भी साथ मौजूद रहे। क्या इन पर कोई दबाव था? इसकी जांच होनी चाहिए। दो मंत्रियों की शिकायत पर ही स्पीकर ने तीनों विधायकों को नोटिस दिया और इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। स्पीकर के नोटिस का बीते 10 अप्रैल को तीनों विधायक जवाब दे चुके हैं। इस बीच तीनों विधायक इस्तीफा स्वीकार कराने के लिए हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट से भी इन्हें राहत नहीं मिली। इस बीच जगत सिंह नेगी ने स्पीकर के बाद दूसरी याचिका दायर की। आज इस पर सुनवाई होनी है। राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ विवाद निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट दिया था। इससे बहुमत वाली कांग्रेस सरकार चुनाव हार गई। राज्यसभा चुनाव से पहले तक तीनों निर्दलीय विधायक सरकार के साथ एसोशिएट के तौर पर काम कर रहे थे। मगर राज्यसभा चुनाव के बाद इन्होंने विधायकी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की। हालांकि तीनों विधायक बिना बीजेपी ज्वाइन किए भी भाजपा को समर्थन दे सकते थे। मगर इन्होंने अपने पदों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने के विकल्प को बेहतर माना।

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