हिमाचल प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा उप चुनाव के लिए आज से नामांकन प्रक्रिया शुरू होने वाली है। मगर सत्तारूढ़ कांग्रेस धर्मशाला सीट पर अब तक प्रत्याशी ही तय नहीं कर पाई। जिताऊ उम्मीदवार की तलाश के कारण टिकट पर पेंच फंसा हुआ है। इसके लिए पांच से छह बार अलग अलग एजेंसियों से सर्वे करवाए जा चुके हैं। बता दें कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने बीते 16 मार्च को लोकसभा के साथ हिमाचल की छह विधानसभा सीटों पर उप चुनाव का भी ऐलान कर दिया था। मगर कांग्रेस इन 52 दिनों में भी धर्मशाला से प्रत्याशी मैदान में नहीं नहीं उतार पाई। इससे धरातल पर अंदरखाते कांग्रेस वर्कर में भी रोष है। ये नाम टिकट दावेदारों की रेस में धर्मशाला में पूर्व मेयर देवेंद्र जग्गी को टिकट का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। मगर कांग्रेस के कुछ नेता यहां से भारतीय जनता पार्टी से बगावत का ऐलान कर चुके राकेश चौधरी को टिकट देने की वकालत कर रहे हैं। राकेश चौधरी ने 2022 का विधानसभा चुनाव BJP के टिकट पर लड़ा था और तब कांग्रेस के सुधीर शर्मा से वह चुनाव हार गए थे। सुधीर शर्मा ने कांग्रेस से बगावत के बाद भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और BJP ने धर्मशाला सीट से उप चुनाव में उन्हें प्रत्याशी बनाया है। सुधीर की BJP में एंट्री के बाद राकेश चौधरी ने बगावत का ऐलान किया। सियासी नफा-नुकसान देखकर होगा टिकट आवंटन धर्मशाला से देवेंद्र जग्गी और राकेश चौधरी के अलावा हरभजन चौधरी, विजय इंद्र कर्ण का नाम भी टिकट दावेदारों की रेस में शामिल है। कांग्रेस को डर है कि राकेश चौधरी की एंट्री से पार्टी के भीतर बगावत के सुर फूट सकते हैं। लिहाजा अब पार्टी नफा-नुकसान को देखकर टिकट तय करेगी। पार्टी सूत्रों की माने तो आज शाम तक धर्मशाला का टिकट अनाउस हो सकता है। सुधीर के सामने मजबूत उम्मीदवार देना चाहते हैं सुक्खू मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू धर्मशाला से पूर्व विधायक सुधीर शर्मा को कांग्रेस से बगावत करने वाले छह विधायकों का सरगना कहते रहे हैं। इसलिए भी मुख्यमंत्री सुक्खू सुधीर को हराने के लिए जिताऊ उम्मीदवार की तलाश को वक्त ले रहे हैं। मगर बीजेपी को इससे मनोवैज्ञानिक बढ़त मिली है। भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी अपने चुनाव क्षेत्र में दो राउंड का कैंपेन कर चुके हैं, वहीं कांग्रेस अभी भी प्रत्याशी तलाश रही है।