हिमाचल में अपने पदों से इस्तीफा देने वाले तीनों निर्दलीय विधायकों को आज विधानसभा स्पीकर के पास पेश होना होगा। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की याचिका पर तीनों विधायकों को नोटिस जारी कर रखा है। राजस्व मंत्री ने याचिका में कहा- इन्होंने इस्तीफा स्वीकार होने से पहले ही BJP जॉइन की है। इनके खिलाफ एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। इन्हें डिस्क्वालिफाइ किया जाए। बता दें कि देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह, नालागढ़ से केएल ठाकुर और हमीरपुर से आशीष शर्मा ने बीते 22 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया। 23 मार्च को इन्होंने दिल्ली में BJP जॉइन की। इसके बाद राजस्व मंत्री और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पीकर को एक याचिका दी, जिसमें इन्होंने शंका जाहिर की कि 5 साल के लिए चुने गए विधायकों ने आखिर 15 महीने में ही रिजाइन क्यों किया? 10 अप्रैल को स्पीकर के नोटिस का दे चुके जवाब शिकायत में कहा गया- BJP ने इन्हें हेलिकॉप्टर से शिमला पहुंचाया। यही नहीं इस्तीफा देते वक्त भाजपा नेता भी साथ मौजूद रहे। क्या इन पर कोई दबाव था? इसकी जांच होनी चाहिए। दो मंत्रियों की शिकायत पर ही स्पीकर ने तीनों विधायकों को नोटिस दिया और इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। स्पीकर के नोटिस का बीते 10 अप्रैल को तीनों विधायक जवाब दे चुके हैं। इस बीच तीनों विधायक इस्तीफा स्वीकार कराने के लिए हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने भी सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। जगत नेगी ने दूसरी याचिका दी इस बीच जगत सिंह नेगी ने स्पीकर के बाद दूसरी याचिका दायर की। इसमें इन्हें डिस्क्वालिफाइ करने की मांग की गई है। जगत नेगी की याचिका पर कोई फैसला देने से पहले स्पीकर ने आज तीनों विधायकों को विधानसभा में हाजिर होने और नोटिस का जवाब देने को कहा है। संभव है कि एक-दो दिन में स्पीकर इनकी याचिका को लेकर अपना फैसला ले लें और अदालत से भी जल्द फैसले की उम्मीद है। इस्तीफा स्वीकार किया तो 9 सीटों पर होंगे उप चुनाव इनका इस्तीफा स्वीकार किया गया तो प्रदेश में छह नहीं बल्कि नौ सीटों पर विधानसभा उप चुनाव होंगे। मगर तीन निर्दलीय विधायकों की सीटों पर अब एक जून को चुनाव की उम्मीद कम बची है। राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ विवाद निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट दिया था। इससे बहुमत वाली कांग्रेस सरकार चुनाव हार गई। राज्यसभा चुनाव से पहले तक तीनों निर्दलीय विधायक सरकार के साथ एसोशिएट के तौर पर काम कर रहे थे। मगर राज्यसभा चुनाव के बाद इन्होंने विधायकी छोड़कर बीजेपी जॉइन की। हालांकि तीनों विधायक बिना बीजेपी जॉइन किए भी भाजपा को समर्थन दे सकते थे। मगर इन्होंने अपने पदों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने के विकल्प को बेहतर माना।

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