हिमाचल के PWD और शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सुजानपुर से कांग्रेस के बागी एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा पर पलटवार किया। विक्रमादित्य ने कहा- शिमला शहर में पानी के प्रोजेक्ट के लिए कंपनी का चयन टैंडर के आधार पर किया गया। शिमला शहर को 24 घंटे पानी देने के प्रोजेक्ट का जिम्मा L-1 फर्म को दिया गया। विक्रमादित्य ने राजेंद्र राणा के उन आरोपों को भी गलत बताया, जिसमे राणा ने आरोप लगाया था कि सरकार ने चुनाव की घोषणा से एक दिन पहले ही 100 करोड़ रुपए फर्म को जारी किए, जिसमे से 10 करोड़ के किक बैक की चर्चाएं बाजार में हो रही हैं। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि, अब तक फर्म को एक भी रुपया नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि, टैंडर देने में कोई अनियमितता नहीं बरती गई, बल्कि पूरी पारदर्शिता से फर्म का चयन किया गया। उन्होंने कहा कि 23 फरवरी को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में फैसले के लिए 13 मार्च 2024 को काउंसिल ऑफ मिनिस्टर की मीटिंग में इस प्रोजेक्ट को अवार्ड करने की मंजूरी प्रदान की। इसलिए राजेंद्र राणा का बयान राजनीति से प्रेरित है। विक्रमादित्य ने कहा कि, आने वाले दिनों में इसका पूरा रिकॉर्ड जनता के सामने रखेंगे। राणा-सुधीर ने लगाए थे ये आरोप बता दें कि राजेंद्र राणा और सुधीर शर्मा तीन दिन पहले प्रदेश सरकार निशाना साधा था। दोनों बागी नेताओं ने सरकार पर अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए है। राणा ने कहा कि 15 मार्च को ही चुनाव आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि 16 मार्च को चुनाव की तारीखों का ऐलान होगा। इसके बाद आनन-फानन में 15 मार्च को ही कंपनी को एडवांस में 100 करोड़ की राशि जारी कर दी गई, जो संदेह पैदा कर रहा है। राणा ने कहा कि उपरोक्त पानी की योजना के लिए तीन बार टेंडर आमंत्रित किए गए थे। हर बार सिर्फ एक ही पार्टी ने इसमें टेंडर भरे। विभाग के मंत्री ने फाइल पर स्पष्ट शब्दों में लिख दिया कि एक ही फर्म को काम नहीं दिया जा सकता। विभागीय मंत्री की टिप्पणी को नजरअंदाज कर मामले को कैबिनेट में लाकर पास कर दिया गया। फिर भी यह प्रोजेक्ट कंपनी आवंटित कर दिया गया। आपको बता दें कि, शिमला शहर को पानी लाने का प्रोजेक्ट ABD (एशियन डेवलपमेंट बैंक) द्वारा वित्त पोषित है।

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