हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर भूकंप से धरती कांपी है। गुरुवार रात 9 बजकर 35 मिनट पर शिमला, चंबा, कुल्लू, मंडी और हमीरपुर जिला में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिएक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 5.3 आंकी गई। यह झटके कई क्षेत्रों में तीन बार तो कुल्लू जिला में चार-पांच बार महसूस किए गए। इससे कुछ देर के लिए लोगों में हड़कंप मच गया। कुछ लोग रात में ही अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रदेश में भूकंप से अब तक जान व माल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन ताइवान और जापान में तीन दिन पहले आए भूकंप से लोग डरे व सहमे हुए है। हिमाचल में ये क्षेत्र संवेदनशील हिमाचल के चंबा, किन्नौर, लाहौल स्पीति, शिमला, कुल्लू और कांगड़ा जिला के कई क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील जोन-5 में आते है। यहां अक्सर भूकंप आता रहता है। बीते 3 अप्रैल को भी लाहौल स्पीति जिला में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। अब जानिए भूकंप क्यों आता है? धरती की सतह मुख्य तौर पर 7 बड़ी और कई छोटी-छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स से मिलकर बनी है। ये प्लेट्स लगातार तैरती रहती हैं और कई बार आपस में टकरा जाती हैं। टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं। ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है और इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। 1905 में आया था विनाशकारी भूकंप भूकंप एक भूगर्भीय घटना है। हिमाचल के कांगड़ा जिला में 4 अप्रैल 1905 को विनाशकारी भूकंप पाया था। इसमें 19 हजार से ज्यादा लोगों की मौत और 53 हजार से ज्यादा मवेशी इसकी चपेट में आए थे। उस दौरान एक लाख से ज्यादा लोगों के घर भूकंप से तबाह हुए थे।