हिमाचल हाईकोर्ट में आज सरकार को गिराने के लिए षड़यंत्र रचने के केस में सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने गगरेट से कांग्रेस के बागी विधायक चैतन्य शर्मा के पिता राकेश शर्मा और हमीरपुर से इंडिपेंडेंट MLA आशीष शर्मा की अग्रिम जमानत 26 अप्रैल तक बढ़ा दी है। राकेश शर्मा और आशीष शर्मा ने केस को वापस लेने के लिए भी याचिका दायर की है। कोर्ट ने आशीष शर्मा और राकेश शर्मा की पिटीशन का सरकार से भी 26 अप्रैल तक जवाब मांगा है। एडवोकेट जनरल अनूप रत्न ने बताया- राकेश शर्मा ने जांच में पुलिस का सहयोग नहीं किया। इस मामले में उन्होंने इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को धमकाया है। यह सारी बातें उन्होंने कोर्ट के ध्यान में लाई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने अग्रिम जमानत देते वक्त स्पष्ट कहा कि जब जब पुलिस राकेश शर्मा और आशीष शर्मा को जांच के लिए बुलाएगी तो उन्हें जांच को जॉइन करना होगा। बता दें कि कांग्रेस के बागी पूर्व MLA चैतन्य शर्मा के पिता उत्तराखंड सरकार से रिटायर मुख्य सचिव है। उन पर पुलिस अधिकारियों को धमकाने व जांच में सहयोग नहीं करना का आरोप है। कांग्रेस के इन विधायकों ने कराई FIR दरअसल, कांग्रेस विधायक संजय अवस्थी और भुवनेश्वर गौड़ ने बालूगंज थाना में एफआईआर कराई है। इसमें आशीष शर्मा और राकेश शर्मा पर सरकार गिराने के लिए षड़यंत्र रचने का आरोप है। इसी मामले में दोनों ने हिमाचल हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले रखी है। आज इनकी अग्रिम जमानत 26 अप्रैल तक बढ़ाई गई। विधायकों की खरीद-फ़रोख़्त का आरोप इन पर आरोप है कि इन्होंने राज्यसभा चुनाव में सरकार गिरने के लिए षड्यंत्र रचा और विधायकों की खरीद-फरोख्त भी की। आशीष शर्मा और राकेश शर्मा पर करोड़ों रुपए के लेन-देन के आरोप लगाए हैं। खास बात यह है कि इस FIR में अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। ऐसे में जांच के दौरान पुलिस और लोगों को भी केस में शामिल कर सकती है। फाइव-सेवन स्टार होटलों में ठहराया, हेलिकॉप्टर से बागियों को ले गए इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने सरकार को गिराने के लिए विधायकों के फाइव से सेवन स्टार होटलों में ठहराने की व्यवस्था की और हेलीकाप्टर से बागी विधायकों को ले जाने में मदद की। उन्होंने सरकार गिराने के लिए षड्यंत्र रचा है। केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की राज्यसभा चुनाव में वोटों की खरीद-फरोख्त करने व करोड़ों के लेन-देन के आरोपों के इस मामले में पुलिस जांच में जुटी हुई है। पुलिस थाना बालूगंज में आरोपियों के खिलाफ 171सी और ई, 120बी आईपीसी एवं पीसी एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिमला पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बहुमत के बावजूद राज्यसभा सीट हारी थी कांग्रेस हिमाचल में 27 फरवरी को हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को कैंडिडेट बनाया था। यहां कुल 68 सीटें हैं। कांग्रेस के पास 40 विधायकों की वजह से बहुमत था। भाजपा के पास 25 विधायक थे जबकि 3 निर्दलीय विधायक हैं। भाजपा ने हर्ष महाजन को कैंडिडेट बनाया था। जब चुनाव हुआ तो 6 कांग्रेसी और 3 निर्दलीय विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। जिस वजह से भाजपा और कांग्रेस कैंडिडेट के 34-34 वोट मिले। इसके बाद लॉटरी से भाजपा के हर्ष महाजन चुनाव जीत गए। इससे राज्य सरकार पर भी संकट आ गया था, जो फिलहाल कांग्रेस हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद टल गया है। इसके बाद कांग्रेस के छह बागी MLA और तीन इंडिपेंडेंट विधायक भी भाजपा का दामन थाम चुके है।