लोकसभा चुनाव के लिए लगी आचार संहिता का असर बुधवार को होने वाले नगर निगम के हाउस पर भी पड़ेगा। इस हाउस में जहां किसी भी तरह की फाइनेंस काम को मंजूरी नहीं मिलेगी, वहीं सिर्फ शहर के कामकाज को सुचारू रूप से चलने के लिए चुनाव आयोग को प्रस्ताव भेजने को लेकर चर्चा होगी। हालांकि, कुछ भाजपा पार्षद चार माह के पानी के बिल को एक साथ जारी करने को लेकर हंगामा कर सकते हैं। पार्षदों का कहना है कि पिछले दो साल में यह पहला मौका है,जब शहरवासियों को पानी के मासिक बिल नहीं दिए जा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया जून में खत्म होगी। ऐसे में शहरवासियों को जून में चार माह के पानी के बिल चुकाने पड़ेंगे। शहर में पानी के 35 हजार पेयजल उपभोक्ता हैं। इनमें 25 हजार घरेलू उपभोक्ता हैं, जबकि 10 हजार व्यावसायिक उपभोक्ता हैं। व्यावसायिक उपभोक्ताओं की पेयजल खपत ज्यादा होने के कारण इनका मासिक औसतन बिल पांच हजार से 20 हजार रुपए आता है। अब अगर एकसाथ कई माह का बिल जारी हुआ तो इन पर बड़ा बोझ पड़ जाएगा। नगर निगम मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि बैठक में लोगों की समस्या को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा जो जरूरी काम है, उसके प्रस्ताव को मंजूरी के लिए चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। नगर निगम की बैठक होती रहेगी, फाइनेंस संबंधी फैसला नहीं होंगे: लोकसभा चुनाव के चलते लागू हुई आचार संहिता के चलते अब नगर निगम सदन में कोई भी नया फैसला नहीं लिया जा सकेगा। जून तक नगर निगम सदन तो बुलाया जाएगा, लेकिन इसमें किसी भी वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलेगी। बीते दिनों वित्त संविदा एवं योजना समिति की मासिक बैठक में कई वित्तीय फैसले लिए थे जिन पर सदन में अंतिम मंजूरी मिलनी थी। लेकिन अब इन प्रस्तावों को सदन में चर्चा के लिए नहीं रखा जाएगा। इनमें कर्मचारियों को चार फीसदी महंगाई भत्ता देने, भरयाल में मेथीनेशन प्लांट लगाने समेत कई प्रस्ताव शामिल हैं। आचार संहिता के बीच शहर में भवनों के नक्शे पास करने के लिए सिंगल अंब्रेला कमेटी की बैठक बुलाने के लिए भी अब चुनाव आयोग से मंजूरी लेनी होगी। यह कमेटी हर महीने में दो बार बैठक बुलाकर नक्शे पास करती है। बिल पांच हजार से 20 हजार रुपए आता है। अब अगर एकसाथ कई माह का बिल जारी हुआ तो इन पर बड़ा बोझ पड़ जाएगा। नगर निगम मेयर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि बैठक में लोगों की समस्या को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा जो जरूरी काम है, उसके प्रस्ताव को मंजूरी के लिए चुनाव आयोग को भेजा जाएगा। टारिंग का काम भी शुरू नहीं हुआ : चुनाव आचार संहिता लगने का नुकसान शहर के लोगों को उठाना पड़ रहा है। शहर की सड़कों की टारिंग को शुरू करने को अभी भी चुनाव आयोग से मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में कब टारिंग का काम शुरू होगा, इस पर अभी तक किसी तरह के कोई संकेत नहीं मिले हैं। वहीं, नगर निगम की ओर से टारिंग को लेकर चुनाव आयोग को पत्र भी भेजा गया है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है। शहर में 15 मार्च से लेकर 15 जून तक ही टारिंग होती है। इसके बाद बरसात होने के चलते टारिंग का काम रोक दिया जाता है। शहर में करीब छह करोड़ से सभी 34 वार्डों की संपर्क सड़कों की टारिंग होनी है। इनमें कई सड़कें ऐसी हैं जिनकी पिछले साल में भी टारिंग नहीं हो पाई थी। इनकी हालत बेहद खस्ता है। आचार संहिता के बीच नगर निगम का हाउस आज… सदन में कंपनी को घेरने की तैयारी: शहर में पानी के बिल जारी न करने पर नगर निगम पार्षदों ने सवाल उठाए हैं। पार्षद सरोज ठाकुर ने कहा कि कंपनी मनमानी बंद करे और लोगों को मासिक बिल जारी करें। नगर निगम सदन में इस बार बिलों पर कंपनी को जवाब देना होगा। उन्होंने कहा बिल कब देंगे, नगर निगम इस पर पानी की कंपनी से जवाब तलब करें। पार्षद कमलेश मेहता ने कहा कि शहरवासी अभी स्कूलों की फीस भर रहे हैं। अब अगर एक साथ पानी के बिल थमाए तो लोगों को परेशानी होगी। कंपनी व्यवस्था सुधारे और पहले की तरह मासिक बिल जारी करें।

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