जिला मुख्यालय के साथ लगते सरकारी हाई स्कूल डुग्घा के दो टीचर्स ने पहल करते हुए अपनी अपनी सेवानिवृत्ति से पहले स्कूल के लिए 3 लाख से ज्यादा रुपए की राशि जेब से खर्च कर भवन निर्माण करवा दिया यहां स्टूडेंट और टीचर्स की सुविधा के लिए उन्होंने दो कमरों का निर्माण करवा कर भीतर जरूरी सुविधाओं को भी उपलब्ध करवा दिया। इस स्कूल के हेडमास्टर प्रदीप ठाकुर और टीजीटी जसवंत सिंह पटयाल ने यह पहल कर दूसरों के लिए भी वह प्रेरणा बने हैं। आज के समय में लोग एक हजार की राशि भी जेब से खर्च करने के लिए कतराते हैं हालांकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं लेकिन जिस तरह इन टीचर्स की ओर से आने वाले समय के लिए यहां अपनी राशि से भवन का निर्माण ही करवाया वह जरूर क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ यहां से शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के लिए भी किसी मिसाल से कम नहीं है। दरअसल यह दोनों टीचर बचपन के दोस्त भी हैं जो एक साथ पढ़े हैं और अब इसी स्कूल में टीचर की नौकरी भी कर रहे हैं और इसी वर्ष यहां से सेवानिवृत भी होंगे। 3 लाख से ज्यादा खर्च हेडमास्टर प्रदीप ठाकुर 31 मई को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। उन्होंने यहां अपनी माता स्वर्गीय सत्यदेवी की पुण्य स्मृति पर 1लाख 51 हजार की राशि जेब से खर्च कर यहां एक कमरे का निर्माण करवाया उसके भीतर सुविधाओं को भी उपलब्ध करवाया। इसी स्कूल के दूसरी टीचर जसवंत सिंह पटयाल जो 31 मार्च को सेवानिवृत हो जाएगे उन्होंने भी एक लाख 21 हजार की राशि खर्च कर अपनी माता स्वर्गीय हंसनो देवी और पिता अनंतराम की स्मृति में कमरे का निर्माण करवाया। यह दोनों टीचर बाल सीनियर सेकेंडरी में एक साथ पढ़े हैं और वहां जो टीचर हुआ करते थे प्रदीप ठाकुर के पिता ठाकुर हरनाम सिंह थे, यही कारण है कि उनके सेवानिवृत टीचर होने के कारण उनसे ही इन कमरों का उद्घाटन भी करवाया। प्रदीप ठाकुर का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद इन कमरों का लाभ स्टूडेंट और टीचर्स को मिल सके इसके लिए यही सोच रखकर उन्होंने इनका निर्माण करवाया है वैसे तो स्कूल के पास भवन का अपना काफी स्पेस है लेकिन आने वाले समय में यहां स्टूडेंट की संख्या बहुत ज्यादा होती है तो यह कमरे भी उनके काम ही आएंगे। उनका कहना है कि फिलहाल इन कमरों में मुख्याध्यापक कक्ष ओर लिपिक कक्ष चलाने का फैसला लिया गया है। यह दोनों टीचर बचपन से एक साथ पढ़े हैं और शिक्षा विभाग में बतौर टीचर भी एक ही वर्ष में नौकरी ज्वाइन की थी।