हिमाचल के मुख्यमंत्री कार्यालय की नई बिल्डिंग के निर्माण का मामला आज हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आएगा। छोटा शिमला स्थित ऐतिहासिक एलर्सली भवन के साथ बनाए गए नए भवन के निर्माण में नियमों की अनदेखी और अनिवार्य सेटबैक का पालन नहीं करने के आरोपों पर अदालत में सुनवाई होगी। नए भवन में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कार्यालय के अलावा मुख्य सचिव और वित्त सचिव के कार्यालय भी बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू सितंबर माह में इसका उद्घाटन कर चुके हैं। मगर कैप्टन अतुल शर्मा ने इसके निर्माण में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। हाईकोर्ट ने इस शिकायत पर स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे जनहित याचिका बनाया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि एलर्सली की ऐतिहासिक इमारत के ठीक साथ कंक्रीट का नया ढांचा खड़ा किया गया है। इससे ऐतिहासिक भवन का मूल स्वरूप प्रभावित होने के साथ निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन की आशंका है। सेटबैक नहीं छोड़ने का आरोप याचिका में RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि नए निर्माण में अनिवार्य सेटबैक नियमों का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने निर्माण की स्वतंत्र जांच करवाने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। न्यायमित्र भी अदालत की करेंगे मदद इसी मामले की पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट देवयानी शर्मा को न्यायमित्र नियुक्त किया है। वह मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर अदालत की मदद करेंगी। पिछली सुनवाई में अदालत ने राज्य सरकार को पूरे मामले पर विस्तृत जवाब और शपथ पत्र दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया था। अब आज की सुनवाई में सरकार के जवाब और निर्माण से जुड़े तथ्यों पर अदालत का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। 40 गाड़ियों की पार्किंग भी बनाई जा रही नए भवन में मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालयों के अलावा मंत्रियों की गाड़ियों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भी की जा रही है। ऐसे में मामला केवल नए सरकारी कार्यालय के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक एलर्सली भवन के आसपास निर्माण की अनुमति, नियमों के पालन और विरासत संरक्षण से भी जुड़ा है। आज की सुनवाई में इन पहलुओं पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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