हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले ही ‘मुख्यमंत्री की कुर्सी’ को लेकर घमासान और गुटबाज़ी की आग सुलगने लगी है। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह को प्रदेश का ‘अगला मुख्यमंत्री’ बनाने के पूर्व महासचिव रजनीश किमटा के बयान ने पार्टी के भीतर नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाने वाले सरकारी उपक्रम HPMC के वाइस चेयरमैन सुरिंदर शर्मा ने ‘दैनिक भास्कर एप’ से बातचीत में रजनीश किमटा के इस दावे पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने किमटा के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसकी निंदा की है। शर्मा ने साफ लहजे में कहा कि ‘मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला पार्टी हाईकमान करता है। उन्होंने कहा: सिलसिलेवार पढ़े कैसे शुरू हुआ विवाद.. किमटा के बयान से सुलगी ‘कुर्सी की जंग’? पूरा विवाद मंगलवार को चौपाल में एक सांस्कृतिक और खेल आयोजन के दौरान शुरू हुआ। इस दौरान रजनीश किमटा ने विक्रमादित्य सिंह को अगला मुख्यमंत्री बता दिया था। उन्होंने कहा कि राजस्थान के दिग्गज नेता सचिन पायलट के बाद विक्रमादित्य की देश के अन्य राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड) में चुनाव प्रचार के लिए डिमांड रहती है। उन्होंने आगे कहा- इस बयान को मुख्यमंत्री के नेतृत्व को चुनौती वाला माना जा रहा रजनीश किमटा के इस बयान से सुक्खू खेमा नाराज है। खिमटा के बयान के सियासी गलियारों में अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कुछ लोग इसे सीएम सुक्खू के नेतृत्व को चुनौती देने वाला मान रहे हैं, क्योंकि वर्तमान में सीएम सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार चल रही है। हालांकि, विक्रमादित्य सिंह ने रजनीश किमटा के इस बयान से पल्ला झाड़ा और खुद को इस विवाद से अलग करने की कोशिश की। विक्रमादित्य ने किमटा के बयान को उनकी ‘व्यक्तिगत भावना’ करार दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विक्रमादित्य ने न तो इस दावे को खारिज किया और न ही अपनी महत्वाकांक्षा को छुपाया, बस गेंद को वक्त के पाले में छोड़ दिया। विक्रमादित्य ने कहा: क्या पार्टी की डिसिप्लेनरी कमेटी लेगा एक्शन? किमटा के बयान के राजनीतिक मायने इसलिए अहम हैं, क्योंकि हिमाचल में कांग्रेस की मौजूदा सरकार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चल रही है। विधानसभा चुनाव दिसंबर 2027 में प्रस्तावित हैं। ऐसे में चुनाव से पहले किसी कैबिनेट मंत्री को अगला मुख्यमंत्री बताना पार्टी के मौजूदा नेतृत्व और भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चा को हवा देता है। किमटा के बयान की एक व्याख्या यह है कि वह विक्रमादित्य सिंह की राजनीतिक स्वीकार्यता, उनकी सक्रियता और दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार के दौरान उनकी भूमिका को रेखांकित कर रहे थे। दूसरी व्याख्या यह है कि इस तरह का बयान चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर संभावित नेतृत्व को लेकर चर्चा शुरू कर सकता है। खासकर तब, जब मुख्यमंत्री पद पर फिलहाल सुक्खू काबिज हैं और पार्टी हाईकमान ने किसी भावी मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा नहीं की है। अब बड़ा सवाल यह है कि पार्टी अध्यक्ष और डिसिप्लेनरी कमेटी इस बयान पर क्या रुख अपनाती है? अनुशासनात्मक कार्रवाई पर फैसला हाईकमान के पाले में: सुरिंदर जब सुरिंदर शर्मा से पूछा गया कि क्या वह किमटा के बयान को पार्टी के संज्ञान में लाएंगे या अनुशासनात्मक कमेटी के सामने कार्रवाई की मांग करेंगे, तो उन्होंने कहा कि यह मामला सभी के संज्ञान में है। उन्होंने आगे की कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट मांग नहीं रखी और कहा कि संबंधित लोगों को तय करना है कि उन्हें क्या करना है।