शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी फंड में कथित गड़बड़ी और कांस्टेबल से धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया गया है। पुलिस थाना सदर में दर्ज एफआईआर के अनुसार, मामला पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरकारी कामकाज के लिए अपनी जेब से खर्च किए गए 1 लाख 87 हजार 890 रुपए के स्वीकृत बिलों का भुगतान उन्हें नहीं किया गया। वहीं, जांच में जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो साल के दौरान 2.35 लाख रुपए की कथित अवैध निकासी का मामला भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, कांस्टेबल को वर्ष 2024 और 2025 में सरकारी कामकाज और व्यवस्थाओं के लिए सामान जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए उन्हें आश्वस्त किया गया था कि पहले अपनी जेब से खर्च करें, बाद में भुगतान कर दिया जाएगा। कांस्टेबल ने व्यवस्थाओं पर कुल 1 लाख 87 हजार 890 रुपए खर्च किए और इसके बिल कार्यालय में जमा करवाए। कार्यालय ने जांच के बाद इन बिलों को भुगतान के लिए मंजूरी भी दे दी थी। हालांकि यह अभी आरोप है और इनकी जांच होनी बाकी है। इसे लेकर संजीव गांधी का पक्ष लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं सुना। पक्ष मिलने के बाद उनकी बात को रखा जाएगा। सिलसिलेवार पढ़ें क्या है पूरा मामला? 6 फरवरी को वाउचर पर हस्ताक्षर करवाने का आरोप: शिकायतकर्ता के मुताबिक, 6 फरवरी 2026 को तत्कालीन एसएसपी ने उन्हें अपने पास बुलाया और भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। उन्हें बताया गया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि उन्हें मिल जाएगी। आरोप है कि हस्ताक्षर करवाने के बावजूद उन्हें पैसे नहीं दिए गए। अकाउंट ब्रांच से भुगतान की जानकारी ली: जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद कांस्टेबल ने कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से भुगतान की जानकारी ली। वहां पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उनके बैंक खाते में जमा नहीं हुई। इसके चलते उन्हें देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से पैसे जुटाने पड़े। फंड से 2.35 लाख की निकासी, खर्च का रिकॉर्ड नहीं: पुलिस के अनुसार, शिकायत के बाद संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें जिला पुलिस के एक फंड से करीब दो साल के दौरान कुल 2 लाख 35 हजार रुपए की कथित अवैध निकासी के तथ्य सामने आए। आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल किन उद्देश्यों के लिए किया गया, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे संबंधित फंड में धन की कमी हो गई थी। स्वीकृत बिलों की राशि दूसरे खाते में स्थानांतरित: रिकॉर्ड के मुताबिक, संजीव कुमार गांधी का एसएसपी शिमला के पद से कार्मिक विभाग में तबादला होने के समय फंड की कमी को पूरा करने के लिए शिकायतकर्ता के स्वीकृत बिलों की राशि दूसरे खाते में स्थानांतरित कर दी गई। आरोप है कि कांस्टेबल को भुगतान करने के बजाय यह रकम संबंधित फंड के खाते में जमा करवाई गई। इस कारण स्वीकृत बिलों की राशि मिलने से शिकायतकर्ता वंचित रह गया। इन धाराओं में दर्ज हुआ केस पुलिस थाना सदर शिमला में अभियोग संख्या 138/2026 के तहत 22 अक्टूबर 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, ये धाराएं आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति के बेईमानी से इस्तेमाल, धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने या इस्तेमाल करने जैसे आरोपों से संबंधित हैं। मामले की जांच जारी है।

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