हिमाचल प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके काटने की घटनाओं पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई। चीफ जस्टिस जीएस संधवालिया और जस्टिस बिपिन चंद नेगी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार कुत्तों का टीकाकरण तो कर रही है, लेकिन उनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। कोर्ट ने शिमला के एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर में स्थायी पशु चिकित्सक न होने पर भी नाराजगी जताई। सरकार को अगली सुनवाई से पहले यहां स्थायी डॉक्टर नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। 6 महीने में 3709 कुत्तों की नसबंदी सरकार की ओर से कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 30 जून 2026 तक प्रदेश में 26 हजार 564 आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया गया, जबकि इस दौरान केवल 3709 कुत्तों की नसबंदी हुई। किन्नौर में 559 कुत्तों का टीकाकरण किया गया, लेकिन एक भी कुत्ते की नसबंदी नहीं हुई। वहीं, शिमला नगर निगम क्षेत्र और आसपास के इलाकों में 4000 से अधिक कुत्तों के टीकाकरण का दावा किया गया। इसके बावजूद 5 अक्टूबर 2026 तक यहां केवल 316 कुत्तों की नसबंदी हो पाई थी। कई जगह स्थायी केंद्रों की कमी कोर्ट की मदद के लिए नियुक्त न्यायमित्र एडवोकेट रागिनी डोगरा ने बताया कि बिलासपुर और नेरचौक में एबीसी केंद्र अभी अस्थायी रूप से चल रहे हैं। ठियोग में भी पोर्टेबल शेल्टरों के सहारे काम किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल निजी डॉक्टरों और एनजीओ को काम सौंपने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए केंद्रों में स्थायी डॉक्टर होने चाहिए, ताकि नियमित रूप से नसबंदी की जा सके। 31 केंद्र चल रहे, 12 नए प्रस्तावित सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में अभी 31 एबीसी केंद्र काम कर रहे हैं, जबकि 12 नए केंद्र खोलने का प्रस्ताव है। इसके अलावा स्कूलों, अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) जैसे संवेदनशील परिसरों में आवारा कुत्तों को घुसने से रोकने के लिए चारदीवारी बनाने और नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे 16,319 परिसरों को सुरक्षित करने की योजना है।