हिमाचल प्रदेश में दिसंबर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सर्वे शुरू कर दिया है। पार्टी सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में संभावित प्रत्याशियों की विनेबिलिटी (जीतने की क्षमता) का आकलन करवा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके लिए दिल्ली की एक एजेंसी को हिमाचल भेज रखा है। यह एजेंसी हिमाचल के अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर सर्वे कर रही है। इस प्रक्रिया के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में टिकट के दावेदारों की संख्या, उनकी स्थानीय पकड़ और चुनाव जीतने की संभावनाओं का फीडबैक जुटाया जा रहा है। यह एजेंसी लगभग दो महीने से सर्वे कर रही है और अभी तक 48 से ज्यादा विधानसभा में सर्वे पूरा कर चुकी है। इस सर्वे को टॉप सीक्रेट रखा गया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं को भी इसकी भनक नहीं लगने दी जा रही, ताकि कोई नेता अपने प्रभाव से सर्वे को प्रभावित न कर सके। इस वजह से सर्वे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। इसे लेकर जब प्रदेश भाजपा नेताओं से बात की गई तो ज्यादातर नेता यह मान रहे हैं कि सर्वे चल रहा है। जर्नेलिस्ट और आम जनता से पूछे जा रहे सवाल सर्वे के लिए हिमाचल पहुंची केंद्रीय टीम जर्नेलिस्ट के साथ-साथ आम लोगों से भी हर विधानसभा क्षेत्र में संभावित प्रत्याशियों के बारे में सवाल पूछ रही है। संभावित उम्मीदवारों को लेकर क्षेत्र में क्या माहौल है, किस नेता की पकड़ मजबूत है और जनता के बीच किसकी स्वीकार्यता अधिक है, इन पहलुओं पर फीडबैक जुटाया जा रहा है। अभी हर विधानसभा में कितने दावेदार और विनेबिलिटी में कौन आगे है, इन दो सवालों पर पार्टी का ज्यादा फोकस है। दूसरे और तीसरे सर्वे में विनेबिलिटी पर ज्यादा फोकस रहने वाला है। 31 अक्टूबर की डेडलाइन बताया जा रहा है कि दिल्ली की एजेंसी को सर्वे पूरा करने के लिए 31 अक्टूबर तक की डेडलाइन दी गई है। इसकी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपने के बाद 10 नवंबर के बाद दूसरे चरण का सर्वे शुरू होगा। दूसरे सर्वे में दावेदारों से ज्यादा फोकस विनेबिलिटी पर रहेगा। जिन 9 सीटों पर कांग्रेस के बागी-निर्दलीय आए, वहां दावेदारों की भरमार सूत्र बताते हैं कि जिन विधानसभा में बीजेपी की 2022 के विधानसभा चुनाव में हार हुई है या बागी मैदान में थे, वहां अभी 10 से 15 दावेदार मैदान में है। इसी तरह, जिन नौ सीटों पर कांग्रेस के छह पूर्व विधायक और तीन निर्दलीय फरवरी 2024 में बीजेपी में शामिल हुए हैं, उनसे से ज्यादातर सीटों पर भी दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा है। मौजूदा MLA के साथ नए चेहरों की भी होगी परख बताया जा रहा है कि बीजेपी के मौजूदा विधायकों और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ चुके नेताओं के अलावा भी दूसरे संभावित प्रत्याशियों को भी सर्वे का हिस्सा बनाया गया है। टिकट के दावेदारों की बढ़ी सकती है सक्रियता विधानसभा चुनाव को अभी 13 से 14 महीने का समय है। शुरुआती सर्वे के बाद टिकट दावेदारी की सक्रियता बढ़ सकती है। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों, जनसंपर्क और संगठन में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिशें तेज होगी। चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम कवायद भाजपा के लिए यह सर्वे आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने की शुरुआती कवायद के तौर पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इसके जरिए पार्टी को अलग-अलग क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की स्थिति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का आकलन करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, सर्वे के आधार पर टिकट तय होने या किसी उम्मीदवार को प्राथमिकता दिए जाने के संबंध में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।