हिमाचल सरकार ने खनन गतिविधियों के प्रशासनिक कामकाज को अलग और व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने उद्योग विभाग के तहत अलग खनन निदेशालय (डायरेक्टरेट ऑफ माइंस) स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में उद्योग विभाग ने अधिसूचना जारी की है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी। अधिसूचना के अनुसार, नवगठित खनन निदेशालय का नेतृत्व डायरेक्टर करेंगे। निदेशक का पद ग्रुप-ए का होगा और इसे IAS कैडर से भरा जाएगा। निदेशक खनन निदेशालय के विभागाध्यक्ष (HoD) होंगे। उनके पास निदेशालय के कामकाज की प्रशासनिक निगरानी, पर्यवेक्षण और नियंत्रण की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, निदेशालय उद्योग विभाग के समग्र प्रशासनिक नियंत्रण में ही काम करेगा। 6 तरह के पद उद्योग विभाग से निदेशालय को स्थानांतरित सरकार ने खनन निदेशालय के सुचारू संचालन के लिए उद्योग विभाग के स्वीकृत पदों को भी स्थानांतरित करने का फैसला लिया है। इनमें एक संयुक्त निदेशक, एक सहायक नियंत्रक (वित्त एवं लेखा), एक अधीक्षक ग्रेड-1, एक वरिष्ठ सहायक, सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित तीन कनिष्ठ कार्यालय सहायक और एक चपरासी का पद शामिल है। इस तरह कुल 8 स्वीकृत पद निदेशालय को दिए गए हैं। आउटसोर्स आधार पर रखे जाएंगे 4 कर्मचारी निदेशालय को आउटसोर्स आधार पर चार मल्टी टास्क वर्कर रखने की भी अनुमति दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि निदेशक को प्रभावी ढंग से जिम्मेदारियां निभाने के लिए आवश्यक अधिकार और कार्य सौंपने के उद्देश्य से संबंधित वैधानिक नियमों और अधिसूचनाओं में जरूरी संशोधन किए जाएंगे। उद्योग विभाग के अधीन रहेगा निदेशालय अधिसूचना के मुताबिक, खनन निदेशालय अलग प्रशासनिक इकाई के रूप में काम करेगा, लेकिन इसका प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग विभाग के पास रहेगा। सरकार के इस फैसले से खनन क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग व्यवस्था तैयार होगी। हालांकि, अधिसूचना में निदेशालय के लिए अलग बजट, नई नीतियों या खनन नियमों में किसी विशिष्ट बदलाव का उल्लेख नहीं किया गया है।