हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहड़ू व रामपुर दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की फोटो पोस्टरों में नहीं लगाने और मंच से उनका नाम नहीं लिए जाने के विवाद में अब कांग्रेस संगठन ने जांच की बात कही है। वहीं, रोहड़ू व रामपुर के कांग्रेस विधायकों व नेताओं ने भी माना कि कार्यक्रमों में वीरभद्र सिंह की फोटो लगनी चाहिए थी। कांग्रेस नेताओं की सफाई वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह की नाराजगी सामने आने के बाद आई हैं। प्रतिभा सिंह के जुबानी हमले के बाद यह मामला तूल पकड़ रहा है। रोहड़ू और रामपुर के बीजेपी नेताओं ने भी वीरभद्र सिंह की अनदेखी को लेकर सवाल खड़े किए है। हिमाचल कांग्रेस के संगठन महासचिव विनोद जिंटा ने इस पूरे मामले की जांच की बात कहीं। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह बहुत बड़े नेता थे। वह कांग्रेस के लिए आदर्श और लोकप्रिय नेता रहे हैं। कांग्रेस पार्टी हमेशा उनका मान-सम्मान करती रही है और आगे भी करती रहेगी। रोहड़ू-रामपुर के विधायकों ने गलती मानी इसी तरह, रोहड़ू के विधायक एमएल ब्राक्टा और रामपुर से कांग्रेस विधायक नंदलाल ने भी माना कि वीरभद्र सिंह की फोटो नहीं लगाना गलती है। ब्राक्टा के अनुसार, उन्होंने अपने संबोधन में रोहड़ू के विकास में वीरभद्र सिंह के योगदान का जिक्र किया था। साथ ही उन्होंने कहा कि बीजेपी इस मामले को बेवजह मुद्दा बना रही है। रामपुर ब्लॉक अध्यक्ष बोले- फोटो लगाना दिमाग में नहीं रहा रामपुर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लाल चंद ने माना कि कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह की फोटो नहीं लग पाई। उन्होंने कहा कि यह जानबूझकर नहीं किया गया। उनके अनुसार, कांग्रेस वीरभद्र सिंह की लीगेसी पर ही काम कर रही हैं। रोहड़ू व रामपुर के दौरे पर गए थे CM बता दें कि दो और तीन अक्टूबर को सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू रोहड़ू व रामपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे। इन दोनों विधानसभा से वीरभद्र सिंह का गहरा नाता रहा है। रोहड़ू से वीरभद्र सिंह ने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की है, जबकि रामपुर उनका अपना घर है। मगर इन दोनों जगह सीएम सुक्खू के कार्यक्रम के दौरान न वीरभद्र सिंह के पोस्टर में फोटो थे और न ही मंच से उनका जिक्र किया गया। इस पर प्रदेश कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने भी सवाल उठाए है। प्रतिभा सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को गुजरे अभी चार-साढ़े चार साल हुए हैं। उन्हें इतनी जल्दी कैसे भुलाया जा सकता है। कांग्रेस की तो कभी ऐसी विचारधारा नहीं रही कि हम पार्टी को बांटे और इस तरीके से गुटबाजी पैदा करें। पहले भी वीरभद्र की अनदेखी के आरोप लग चुके प्रतिभा के इस बयान के बाद कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई एक बार फिर खुलकर सामने आई है। पहले भी प्रतिभा सिंह और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह वीरभद्र की अनदेखी का मामला हाईकमान के समक्ष उठा चुके हैं। इसी वजह से विक्रमादित्य सिंह ने तो फरवरी 2024 में मंत्री पद से भी इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि सीएम सुक्खू और वीरभद्र सिंह दोनों में छत्तीस का आंकड़ा रहा है। इस वजह से भी वीरभद्र सिंह की अनदेखी का मामला साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में गुटबाजी को उभार सकता है।