हिमाचल में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की लीगेसी (विरासत) को लेकर कांग्रेस में एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है। वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी एवं पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने मंगलवार को रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू के हालिया कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाए। प्रतिभा ने कहा कि वीरभद्र को गुजरे अभी चार-साढ़े चार साल ही हुए हैं। इतनी जल्दी उन्हें भुला दिया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री सुक्खू के बीते शुक्रवार को रोहड़ू और शनिवार को रामपुर विधानसभा के दौरे पर थे। इस दौरान लगाए गए पोस्टरों से वीरभद्र सिंह की फोटो नदारद रही। रोहड़ू वीरभद्र सिंह की कर्मभूमि रही है। यहां से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। वीरभद्र सिंह छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और कई बार सांसद व विधायक रहे। ऐसे में रोहड़ू में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान मंच से वीरभद्न सिंह का नाम तक नहीं लिया गया। न ही पोस्टर में वीरभद्र की फोटो लगाई गई। इस पर प्रतिभा सिंह ने नाराजगी जताई। प्रतिभा सिंह ने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि अगर इन्होंने (आयोजकों) फोटो नहीं लगाई तो कम से कम अपने लोग ही खुद 20 पोस्टर बनाकर लगा देते। भाषणबाजी में भी जिक्र नहीं किया: प्रतिभा प्रतिभा ने कहा जब भाषणबाजी कर रहे थे तो उस दौरान ही राजा साहब का जिक्र कर लेते, बोलना चाहिए था कि ये-ये काम उन्होंने किए, आज भी लोग याद करते हैं। तभी अगली पीढ़ी सीखेगी, पर ये दुर्भाग्य की बात है कि वीरभद्र सिंह का जिक्र तक नहीं किया गया। प्रतिभा सिंह ने कहा कि अगर हम सिरमौर जाते हैं और कोई फंक्शन, कोई मीटिंग होती है तो डॉ. यशवंत सिंह परमार का नाम लिए बिना आगे नहीं बढ़ते, क्योंकि वो हिमाचल निर्माता थे। हिमाचल व सिरमौर से वो बिलॉन्ग करते थे। डॉ. परमार हमारे लिए आदरणीय है, पूजनीय है। उन्होंने कहा कि उसी तरह से राजा साहब ने भी कोई कमी नहीं रखी हिमाचल के लिए। वो भी हमारे लिए माननीय व सम्माननीय हैं। उनको याद रखना और अगली पीढ़ी को बताना ये हमारा कर्तव्य है।
रोहड़ू-रामपुर में दोनों जगह पोस्टर से वीरभद्र सिंह गायब रहे यही वजह है कि प्रतिभा सिंह के बयान को कांग्रेस के भीतर वीरभद्र सिंह परिवार और संगठन के मौजूदा नेतृत्व के बीच मतभेदों के संदर्भ में देखा जा रहा है। बीजेपी ने भी इसे मुद्दा बनाया है, क्योंकि सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के रोहड़ू और रामपुर दोनों विधानसभा क्षेत्रों के कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह का जिक्र तक नहीं किया गया। दोनों विधानसभा के कार्यक्रम में लगे पोस्टरों से वीरभद्र सिंह गायब रहे। सुक्खू-वीरभद्र के बीच हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा हिमाचल की राजनीति में वीरभद्र सिंह और सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच हमेश छत्तीस का आंकड़ा रहा है। वीरभद्र सिंह की अनदेखी को लेकर ही पीडब्ल्यूडी मंत्री एवं वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने फरवरी 2024 में अपने मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया था, क्योंकि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में मंजूरी के बावजूद रिज पर वीरभद्र सिंह की प्रतिमा स्थापित नहीं की जा रही थी। हालांकि हाईकमान में हस्तक्षेप के बाद विक्रमादित्य का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया और उन्हें मना लिया गया था और बाद में वीरभद्र सिंह की प्रतिमा यहां स्थापित कर दी गई थी। छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र, कांग्रेस की राजनीति में अब भी प्रभाव वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनका राजनीतिक जीवन करीब छह दशक लंबा रहा और वे कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली हिमाचली नेताओं में शामिल रहे। ऐसे में रोहड़ू में प्रतिभा सिंह का यह बयान महज एक परिवार की नाराजगी के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि कांग्रेस में वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर चल रही बहस को फिर सामने लाता है।