हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित अपने आधिकारिक आवास पर तिब्बती धर्मगुरु 14वें दलाई लामा ने शुक्रवार को एक विशेष धार्मिक समारोह के दौरान नए भिक्षुओं और भिक्षुणियों को दीक्षा दी। इस पावन अवसर पर दीक्षा लेने वालों में मुख्य रूप से ताइवान से आए श्रद्धालु और बौद्ध अनुयायी शामिल थे। बौद्ध परंपरा में नवदीक्षा का महत्व बौद्ध धर्म में ‘नवदीक्षा’ को व्यक्ति के नए आध्यात्मिक जीवन का आरंभ माना जाता है। यह पूर्ण भिक्षु (भिक्षु/भिक्षुणी) बनने से पहले का एक प्रारंभिक और महत्वपूर्ण चरण है। इस दौरान दीक्षा लेने वाला व्यक्ति सांसारिक मोह-माया को त्यागकर बौद्ध मठों के कड़े नियमों, अनुशासन और सिद्धांतों का पालन करने का अटूट संकल्प लेता है। दीक्षा समारोह की मुख्य बातें: पारंपरिक अनुष्ठान: दीक्षा लेने वाले नए साधकों ने पारंपरिक सफेद वस्त्र धारण कर समारोह में भाग लिया। इस दौरान सहायक भिक्षुओं ने उनके बाल काटने की रस्म निभाई, जबकि वरिष्ठ भिक्षुओं ने बौद्ध मंत्रोचार और विशेष प्रार्थनाएं कीं। धर्मगुरु का उपदेश व नए नाम: दलाई लामा ने नवदीक्षितों को बौद्ध दर्शन के अनुसार धार्मिक निर्देश दिए और उनके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत के प्रतीक के रूप में नए धार्मिक नाम प्रदान किए। बुद्ध प्रतिमा भेंट: समारोह के समापन पर दलाई लामा ने सभी नए भिक्षुओं और भिक्षुणियों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें स्मृति चिन्ह के रूप में भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं भेंट कीं।
दीक्षा की तस्वीरें

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