हिमाचल में कांगड़ा जिले के शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक एवं पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उन्होंने कांगड़ा के सिटी हॉस्पीटल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। इससे पहले सुबह के वक्त घर पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। तब उन्हें अस्पताल ले जाया गया। मनकोटिया के शव को अब अस्पताल से घर तियारा गांव लाया जा रहा है। मेजर मनकोटिया हिमाचल की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह 1982 में पहली बार शाहपुर से निर्दलीय चुनाव लड़े और विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1985, 1990, 1993 और 2003 में भी शाहपुर से विधानसभा पहुंचे। अपने लंबे राजनीतिक करियर के दौरान वह अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहे। वह कांग्रेस के अलावा जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़े। उनके निधन की खबर से कांगड़ा समेत पूरे हिमाचल के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। हिमाचल सरकार में रहे मंत्री मेजर मनकोटिया पूर्व कांग्रेस सरकारों में दो बार (1995 और 2003) मंत्री और एक बार पर्यटन विकास निगम के वाइस चेयरमैन भी रहे। लंबे राजनीतिक अनुभव और बेबाक अंदाज के कारण प्रदेश की राजनीति में उनकी अलग पहचान थी। हालांकि, चार साल पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। वीरभद्र सिंह से रहा राजनीतिक टकराव मेजर मनकोटिया की पहचान हिमाचल की राजनीति में बेबाक नेता के तौर पर भी रही। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ उनके राजनीतिक संबंध कई बार तनावपूर्ण रहे। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मतभेदों का दौर कई बार सामने आया और बाद में संबंधों में सुधार भी हुआ। 2017 में मनकोटिया और वीरभद्र सिंह के बीच फिर से राजनीतिक दूरी बढ़ गई थी। मनकोटिया ने उस समय कहा था कि वह अपने मन की बात खुलकर कहने के परिणामों से वाकिफ थे। सेना में भी दी थी सेवाएं राजनीति में आने से पहले मेजर विजय सिंह मनकोटिया भारतीय सेना में अधिकारी रहे। सेना से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और शाहपुर क्षेत्र से अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। 2012 के बाद चुनावी राजनीति में नहीं मिली वापसी साल 2003 में पांचवीं बार विधायक बनने के बाद मनकोटिया 2007 में शाहपुर से चुनाव नहीं जीत सके। 2012 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा की सरवीण चौधरी से हार गए। 2017 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और फिर सरवीण चौधरी से हार गए। इसके बावजूद शाहपुर और कांगड़ा की राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही। 2017 के चुनाव में वह शाहपुर सीट पर दूसरे स्थान पर रहे थे। कांगड़ा ने अनुभवी नेता खोया: काजल मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर कांगड़ा से विधायक पवन काजल ने शोक जताया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला ने एक अनुभवी और ईमानदार नेता खो दिया है। उन्होंने दिवंगत नेता के परिवार के प्रति संवेदना जताई। बेटा-बेटी दोनों विदेश में रहते हैं मेजर मनकोटिया अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए है। बेटा यूएसए और बेटी भी विदेश में ही रहती है। उनका अंतिम संस्कार बच्चों के आने के बाद ही तय होगा।

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