किन्नौर जिले में राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग (NCD) नियंत्रण कार्यक्रम के तहत ब्लड प्रेशर, शुगर, कैंसर, सांस, लिवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों की समय पर पहचान व रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) किन्नौर, डॉ. पुष्प राज ठाकुर ने आम जनता से अपील की है कि वे साल में कम से कम एक बार अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर बीपी और शुगर की जांच अनिवार्य रूप से करवाएं। सीएमओ डॉ. पुष्प राज ठाकुर ने बताया कि कार्यक्रम के तहत जांच प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है। जानिए किस चरण में क्या पहला चरण: आशा वर्कर्स घर-घर जाकर फॉर्म भरती हैं और गंभीर बीमारियों के प्रति संवेदनशील लोगों की पहचान करती हैं। दूसरा चरण: चिन्हित व्यक्तियों की नजदीकी उप-स्वास्थ्य केंद्रों में एएनएम (ANM) द्वारा बीपी और शुगर की जांच की जाती है। तीसरा चरण: जांच में लक्षण या समस्या पाए जाने पर मरीज को डॉक्टर के पास भेजा जाता है, जहां इलाज शुरू कर हर तीन महीने में पोर्टल के माध्यम से उसकी सेहत का फॉलो-अप लिया जाता है। निःशुल्क जांच व दवाइयां, 65% आबादी की स्क्रीनिंग पूरी डॉ. पुष्प राज ने स्पष्ट किया कि NCD प्रोग्राम के तहत सभी प्रकार के बीपी-शुगर टेस्ट, अन्य जांचें और दवाइयां पूरी तरह मुफ्त दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक लगभग 65 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग पूरी कर ली गई है, जिसके तहत 6,000 लोगों के बीपी और शुगर टेस्ट किए जा चुके हैं। कई मरीजों का इलाज शुरू कर उनकी नियमित निगरानी की जा रही है। शुरुआती पहचान से टल सकते हैं पैरालिसिस और किडनी फेलियर जैसे खतरे सीएमओ ने चेतावनी दी कि पैरालिसिस (लकवा) और किडनी फेल होने जैसी गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण अनियंत्रित बीपी और शुगर होता है। यदि शुरुआत में ही इनका पता चल जाए तो सही इलाज से बीमारियों को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने सभी किन्नौर निवासियों से इस सरकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया।

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