मंडी जिले में एचआरटीसी की 25 इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। इनसे यात्रियों को आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल सफर मिल रहा है। वहीं, निगम को भी बसों के चलाने के खर्च में काफी बचत हो रही है। 17 अगस्त से 10 सितंबर 2026 तक मंडी और सुंदरनगर इकाइयों में इलेक्ट्रिक बसों को चलाने से कुल 19 लाख 31 हजार 955 रुपए की बचत हुई है। मंडी डिपो की 15 इलेक्ट्रिक बसों ने 60,060 किलोमीटर का सफर तय किया। इन बसों की चार्जिंग पर 7 लाख 95 हजार 795 रुपये खर्च हुए। इतनी ही दूरी डीजल बसों से तय करने पर 19 लाख 30 हजार 055 रुपए का खर्च आता। इस तरह मंडी इकाई को 11 लाख 34 हजार 260 रुपए की बचत हुई। इसी तरह सुंदरनगर डिपो की 10 इलेक्ट्रिक बसों ने 35,044 किलोमीटर की दूरी तय की। इन पर चार्जिंग का खर्च 2 लाख 10 हजार 037 रुपये रहा। जबकि डीजल बसों से इतनी दूरी तय करने पर 10 लाख 07 हजार 732 रुपये खर्च होते। सुंदरनगर इकाई ने 7 लाख 97 हजार 695 रुपए की बचत की। कई रूटों पर चल रहीं बसें ये इलेक्ट्रिक बसें मंडी-शिमला, मंडी-पालमपुर, मंडी-चंडीगढ़, मंडी-सुंदरनगर, मंडी-कोटली, मंडी-रिवालसर-नैनादेवी और मंडी-दुर्गापुर जैसे कई अहम रूटों पर चल रही हैं। इलेक्ट्रिक बसों का यह विस्तार प्रदेश सरकार के स्वच्छ और हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है। यात्रियों ने भी इलेक्ट्रिक बसों के सफर को शांत और आरामदायक बताया है। उनका कहना है कि इन बसों में शोर कम होता है। साथ ही सीटें भी आरामदायक हैं। यह पर्यावरण बचाने की दिशा में भी एक अच्छी पहल है। इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा खर्च में बचत निगम के मंडलीय प्रबंधक उत्तम सिंह के मुताबिक, डीजल बसों के मुकाबले इलेक्ट्रिक बसों से ऊर्जा खर्च में करीब 12 से 13 रुपए प्रति किलोमीटर की बचत हो रही है। मंडी बस स्टैंड, मंडी वर्कशॉप और सुंदरनगर बस स्टैंड पर चार्जिंग स्टेशन बन चुके हैं। जंजैहली में भी चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है।