नंदीग्राम से उनकी उम्मीदवार छोड़कर चली गईं, चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव निशान freeze कर दिया, पार्टी का नाम बदल दिया और ममता इन सबके लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार न ठहराएं, तो किसे ठहराएं? पर उन्हें ये सोचना चाहिए कि आख़िरकार ये सब क्यों हुआ? 

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