हिमाचल प्रदेश वन निगम के पूर्व उपाध्यक्ष एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता सूरत नेगी ने सीमावर्ती व जनजातीय जिले किन्नौर के लिए एक बड़ी खुशखबरी साझा की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन मिशन’ योजना के तहत किन्नौर जिले के सर्वांगीण विकास के लिए 30 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। इस भारी-भरकम धनराशि से जिले के दूरदराज और जनजातीय इलाकों में शहरी तर्ज पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। देशभर में स्वीकृत 300 रूर्बन क्लस्टरों में से 109 जनजातीय क्लस्टर हैं, जिनमें किन्नौर के दो प्रमुख क्लस्टरों को शामिल किया गया है। इनके लिए 15-15 करोड़ आवंटित किया गया। पलायन पर लगेगी लगाम, गांवों को मिलेंगी शहरों जैसी सुविधाएं सूरत नेगी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की अनूठी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए वहां पक्की सड़कें, पीने का पानी, स्ट्रीट लाइट्स, कचरा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और पर्यटन-बागवानी प्रसंस्करण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं पहुंचाना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन पर रोक लगेगी। किस क्लस्टर को कितना आवंटन सांगला क्लस्टर (₹15 करोड़): इसके अंतर्गत आने वाली सांगला, कामरू, चांसू, थेमगारंग, बटसेरी, रक्छम और छितकुल पंचायतों को विकास कार्यों के लिए लगभग 2-2 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मूरंग क्लस्टर (₹15 करोड़): इसमें अकेले मूरंग पंचायत के विकास के लिए ₹12.80 करोड़ की बड़ी राशि आवंटित की गई है, जबकि शेष ₹2.20 करोड़ ठंगी, कुन्नू-चारंग और रिस्पा पंचायतों को दिए गए हैं। PM मोदी और पूर्व CM जयराम ठाकुर का जताया आभार सूरत नेगी ने बताया कि मूरंग पंचायत में इस मिशन के तहत ऐतिहासिक और बेहतरीन कार्य देखने को मिला है, जिसके लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि बधाई के पात्र हैं। उन्होंने जनजातीय इलाकों को प्राथमिकता देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का धन्यवाद किया, जिनकी कोशिशों से समय पर डीपीआर (DPR) केंद्र को भेजी गई और यह बजट मंजूर हो सका।