हिमाचली संस्कृति, देव आस्थाओं और पर्यावरण संरक्षण पर बनी फिल्म “खूंटा” 18 सितंबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। मंडी में हुई पत्रकार वार्ता में फिल्म की राइटर-डायरेक्टर अनुषी शर्मा और प्रोड्यूसर मुकेश मोदी ने फिल्म की कहानी और इसे बनाने के अनुभव बताए। राइटर-डायरेक्टर अनुषी शर्मा ने बताया कि “खूंटा” की कहानी हिमालय की संवेदनशीलता और यहां के लोगों के प्रकृति से रिश्ते को दिखाती है। हिमालयी पहाड़ जिस तरह नाजुक हैं, उसी तरह यहां की संस्कृति और परंपराओं से जुड़े लोग भी अपनी जड़ों से बंधे हुए हैं। फिल्म यह सवाल उठाती है कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास और विनाश एक-दूसरे के विरोधी न बनें। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। पर्यावरण और इंसानी भावनाओं का गहरा रिश्ता फिल्म की कहानी एक ऐसी महिला के आसपास घूमती है, जिसका पति गायब है और वह उसकी तलाश कर रही है। इसी सफर में नदी, पहाड़, पर्यावरण और इंसानी भावनाओं का गहरा रिश्ता सामने आता है। यह फिल्म हिमाचली देव आस्थाओं, परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर भी दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तारीफ मिली प्रोड्यूसर मुकेश मोदी ने बताया कि फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तारीफ मिली है। इसकी स्क्रीनिंग कान्स फिल्म फेस्टिवल में हुई थी। इसे लंदन इंडिपेंडेंट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट फॉरेन फिल्म, कोलकाता में बेस्ट इंडियन फीचर फिल्म और लास वेगास के बॉलीवुड हॉलीवुड फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है। नॉर्वे के फिल्म फेस्टिवल में भी फिल्म को चुना गया है। न्यूयॉर्क में हुए दोनों शो दर्शकों की मांग पर हाउसफुल रहे थे। क्षेत्रीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास फिल्म की टीम के अनुसार, “खूंटा” हिमाचल को सिर्फ खूबसूरत पहाड़ों के बैकग्राउंड के तौर पर नहीं दिखाती। यह यहां के गांवों, जीवनशैली, भाईचारे, पशुओं से लगाव और प्रकृति के प्रति श्रद्धा को कहानी का हिस्सा बनाती है। साथ ही यह हिमाचली भाषा और क्षेत्रीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि “खूंटा” सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, प्रकृति और भविष्य के बारे में सोचने का एक प्रयास है।

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