हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन के बीच आढ़तियों ने अडानी समेत दूसरे कॉर्पोरेट घरानों के बहिष्कार की अपील की है, क्योंकि प्राइवेट कंपनियों ने ओपन मार्केट में अच्छे रेट के बावजूद कम रेट खोले हैं। खासकर छोटे सेब के दाम काफी गिराए गए हैं। आढ़तियों के मुताबिक, निजी कंपनियां सेब के बाजार को गिराने की साजिश रच रही हैं। इस बीच ठियोग के विधायक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप राठौर ने भी छोटे सेब के कम रेट पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बागवान पहले ही मौसम, अधिक लागत और कम उत्पादन की मार झेल रहे हैं। ऐसे में उनकी मजबूरी का फायदा उठाना उचित नहीं है। उन्होंने चेताया कि बागवानों के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। राठौर ने हिमाचल प्रदेश मार्केटिंग बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बोर्ड केवल दर्शक बनकर नहीं रह सकता। उसे बागवानों के हितों की रक्षा के लिए खरीद और विपणन व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मंडियों में ₹110 बिक रहा पितू सेब, निजी कंपनियां ₹60 रुपए खरीद रही: हरीश वहीं हिमाचल आढ़त एसोसिएशन के चेयरमैन हरीश ठाकुर ने कहा कि पराला मंडी में इन दिनों 105 रुपए से 170 रुपए प्रति किलो के हिसाब से सेब बिक रहा है, जबकि निजी घराने 40 रुपए से 115 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीद रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडियों में ‘पितू’ (सबसे छोटे आकार का) सेब 100 से 120 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। इसके विपरीत निजी कंपनियों ने पितू सेब का शुरुआती रेट लगभग 60 रुपए रखा है। प्राइवेट कंपनियों को भी गड्ढ में सेब खरीदने के लिए बाध्य करें सरकार: प्रताप हिमाचल आढ़त एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रताप चौहान ने कहा कि हर साल निजी कंपनियों के रेट ओपन करते ही ओपन मार्केट गिर जाती है। इसकी बड़ी वजह प्राइवेट कंपनियों द्वारा ‘ए’ ग्रेड सेब खरीद लिया जाना है, जबकि बाकी सारा सेब रिजेक्ट करके मंडियों को भेज दिया जाता है। इससे हर साल सेब की मार्केट गिरती है। इसे देखते हुए उन्होंने मांग की है कि सरकार प्राइवेट कंपनियों को भी गड्ढ (सभी साइज का सेब एक रेट पर बेचना) में सेब खरीदने के लिए बाध्य करे, जिस प्रकार आढ़तियों को किया जाता है। ओपन मार्केट में औसत रेट, कंपनियां अलग-अलग ग्रेड में खरीद रहीं हरीश ठाकुर ने कहा कि मंडियों में बागवानों को अलग-अलग साइज का सेब औसत रेट यानी ‘गड्ड’ में बिकता है। बागवानों को पूरे लॉट का बेहतर औसत मूल्य मिलता है। वहीं, निजी कंपनियां अलग-अलग आकार और ग्रेड के सेब की अलग-अलग कीमत तय कर खरीदती हैं। इससे बागवानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी वजह से सेब का बाजार गिरता है। निजी कंपनियों के खिलाफ आढ़ती लामबद्ध हरीश ठाकुर ने कहा कि आढ़ती एसोसिएशन ने इसी मसले पर एक मीटिंग भी कर ली है। इसमें सभी आढ़तियों ने निजी कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। इससे आढ़तियों नहीं, बल्कि बागवानों का फायदा होगा और आने वाले सालों में भी सेब का बाजार इनकी साजिश से नहीं गिर सकेगा।

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