हिमाचल प्रदेश के ऊंचे हिमालयी इलाकों में ग्लेशियर पीछे हट रहे हैं। इससे तापमान बढ़ रहा है। इसी वजह से ग्लेशियल झीलें तेजी से फैल रही हैं। साल 2025 के आकलन में 3,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर 2,076 ग्लेशियल झीलें पहचानी गई हैं। साल 2015 के मुकाबले इनकी संख्या 710 बढ़ी है। इनका कुल क्षेत्रफल 28.45 प्रतिशत बढ़ गया है। इससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ने की आशंका है। एक अध्ययन में 10 समान मानकों के आधार पर AHP, TOPSIS और Entropy-AHP तरीकों से इन झीलों की GLOF संवेदनशीलता का पता लगाया गया। AHP तरीके में 9 झीलें बहुत ज्यादा संवेदनशील और 435 ज्यादा संवेदनशील श्रेणी में रखी गईं। वहीं, TOPSIS तरीके में सिर्फ पांच झीलें ‘बहुत ज्यादा संवेदनशील’ श्रेणी में आईं। EAHP तरीके में 72 प्रतिशत से ज्यादा झीलें ‘ज्यादा संवेदनशील’ या ‘बहुत ज्यादा संवेदनशील’ श्रेणी में पाई गईं। 164 हेक्टेयर की झील से 24 हेक्टेयर तक अध्ययन की लिस्ट में समुद्र टापू, गेफांग गाथ, काशांग, कालिकुंड और चंद्रताल को साल 2025 के आकलन में ‘बहुत ज्यादा संवेदनशील’ श्रेणी की 5 मुख्य झीलों के रूप में बताया गया है। इनमें समुद्र टापू का क्षेत्रफल करीब 164.46 हेक्टेयर, गेफांग गाथ का 110.80 हेक्टेयर, काशांग का 35.35 हेक्टेयर, कालिकुंड का 24.56 हेक्टेयर और चंद्रताल का करीब 46.86 हेक्टेयर है। इन सभी में बांध के लिए मलबा बताया गया है। सुराई खास चिंता वाले इलाके सामने आए नीचे की ओर के जोखिम के आकलन में योचे, गेफांग गाथ, कालिकुंड और सुराई खास चिंता वाले इलाके सामने आए हैं। लिस्ट में वासुकी और क्या त्सो जैसी दूसरी झीलों के आसपास भी पुल, सड़क, बांध, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल जैसी चीजें पाई गई हैं। योचे के पास बस्तियां और पुल मौजूद हैं। कालिकुंड के आसपास शाओर और पूर्थी क्षेत्र के साथ स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं भी पहचानी गई हैं। क्षेत्रफल और पानी की मात्रा खास कारक शोध में बताया गया है कि झील का क्षेत्रफल और उसमें पानी की मात्रा खास कारक हैं। परमाफ्रॉस्ट का पिघलना, मोरेन बांध की स्थिति और ग्लेशियर-झील का जुड़ाव भी संवेदनशीलता तय करने में खास भूमिका निभाते हैं। चार अलग-अलग स्थितियों में किए गए संवेदनशीलता विश्लेषण में ‘बहुत ज्यादा संवेदनशील’ श्रेणी की स्थिरता भी दिखी। शोधकर्ताओं के अनुसार इन झीलों की नियमित फील्ड मॉनिटरिंग, डाउनस्ट्रीम जोखिम आकलन और आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देना जरूरी है।