हिमाचल किसान सभा (रामपुर परियोजना 412 मेगावाट प्रभावित कमेटी) के आह्वान पर आगामी 25 अगस्त को निरमंड में एसडीएम कार्यालय के बाहर एक विशाल रोष प्रदर्शन किया जाएगा। यह प्रदर्शन पिछले कई वर्षों से लंबित पड़ी परियोजना प्रभावित किसानों की मांगों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने के लिए प्रभावित पंचायतों में गांव स्तर पर ताबड़तोड़ बैठकें की जा रही हैं। इस आंदोलन को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में भारी आक्रोश है। प्रदर्शन में मुख्य रूप से गड़ेच, बाहवा, बाड़ी, कशोली, पोषना, ब्रो, जगातखाना, तुनन, बखन, खरगा और कुशवा सहित दर्जनों प्रभावित पंचायतों के सैकड़ों किसान और उनके परिवार शामिल होंगे। 2019-20 के बाद नहीं मिली रॉयल्टी हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव देवकी नंद, जिला अध्यक्ष रणजीत ठाकुर, महासचिव प्रेम चौहान, पूर्ण ठाकुर, सुभाष और दयाल सिंह ने संयुक्त बयान में बताया कि 412 मेगावाट रामपुर परियोजना का निर्माण वर्ष 2014 में पूरा हो गया था और बिजली उत्पादन भी शुरू हो गया था। नियमानुसार, परियोजना प्रभावित परिवारों को कुल बिजली उत्पादन का 1 प्रतिशत हिस्सा प्रति वर्ष रॉयल्टी के रूप में मिलना तय हुआ था। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावित परिवारों को केवल वर्ष 2019-20 तक की ही रॉयल्टी राशि जारी की गई है। इसके बाद की रॉयल्टी का भुगतान पूरी तरह से रोक दिया गया है, जिससे किसानों को गहरे आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है। फसलों के नुकसान का मुआवजा भी अटका किसानों की केवल रॉयल्टी ही नहीं, बल्कि मुआवजे की राशि भी प्रशासन दबाए बैठा है। किसान नेताओं ने कहा कि परियोजना निर्माण के दौरान उड़ी भारी धूल से फसलों को जो नुकसान हुआ था, उसका वर्ष 2012-13 और 2013-14 का मुआवजा भी आज तक प्रभावितों को नहीं मिला है। किसानों को उम्मीद थी कि इस राशि से वे अपने परिवारों का पालन-पोषण ठीक से कर पाएंगे, लेकिन समय पर भुगतान न होने से उनके सामने आर्थिक परेशानियां खड़ी हो गई हैं। आर-पार की लड़ाई की चेतावनी किसान सभा के नेताओं ने प्रदेश सरकार, ऊर्जा विभाग और स्थानीय प्रशासन पर किसानों की जायज मांगों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक प्रभावितों की सभी लंबित मांगों का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक यह संघर्ष थमने वाला नहीं है। 25 अगस्त का प्रदर्शन प्रशासन की आंखें खोलने का काम करेगा।