हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। सेशन की कार्यवाही शुरू होने से पहले भाजपा विधायकों ने बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया और आक्रोश रैली निकाली। भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए विधानसभा परिसर में पहुंचे और प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे पर कांग्रेस सरकार को घेरा। बीजेपी ने पहले ही दिन बेरोजगारी के मुद्दे पर चर्चा की मांग के लिए स्थगन प्रस्ताव लाया। सदन में अभी पूर्व विधायक विजयेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया शोकोद्गार चल रहा है। इसके बाद तय होगा कि स्थगन प्रस्ताव पर सरकार चर्चा को तैयार होती है या नहीं। यदि सरकार चर्चा को टालती है तो सदन में इस मुद्दे पर हंगामा देखने को मिलेगा। पहली ही कैबिनेट में एक लाख नौकरी का किया था वादा: रणधीर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के दौरान हर साल एक लाख और पांच साल में पांच लाख नौकरियां देने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि पहली कैबिनेट बैठक में सरकारी नौकरी देने का वादा भी कांग्रेस के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल था, लेकिन सरकार पौने चार साल के कार्यकाल में इस दिशा में अपेक्षित काम नहीं कर पाई। रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रदेश के युवाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से भर्तियां नहीं की जा रही हैं और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। ‘पौने चार साल में कुछ हजार नौकरियां ही’ भाजपा विधायक ने कहा कि सरकार के पौने चार साल के कार्यकाल में कुछ हजार युवाओं को ही नौकरियां मिल पाई हैं। उनका आरोप था कि जिन लोगों को रोजगार दिया भी गया है, उनमें बड़ी संख्या में नियुक्तियां नियमित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को या तो आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार दिया जा रहा है या अलग-अलग योजनाओं के तहत नियुक्तियां की जा रही हैं। भाजपा का कहना है कि प्रदेश के युवाओं को स्थायी और नियमित सरकारी रोजगार देने के चुनावी वादे पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि बेरोजगारी प्रदेश के युवाओं से सीधे जुड़ा गंभीर मुद्दा है और इसे सदन की सामान्य कार्यवाही तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। भाजपा इस मुद्दे पर सरकार से चुनावी वादों की स्थिति और अब तक किए गए रोजगार सृजन के काम का हिसाब मांग सकती है। बारिश से नुकसान और सड़कों की बदहाली पर तपेगा सदन 10 दिन के सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक बारिश और मानसून से हुए नुकसान, सड़कों की बदहाली, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था, सरकारी भर्तियों, रोजगार और जनहित से जुड़े दूसरे मुद्दों को सदन में उठाएंगे। मानसून सत्र के लिए विधायकों की ओर से कुल 1,036 सवाल लगाए गए हैं। इनमें 787 तारांकित और 249 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं। इन सवालों के जरिए विधायक अपने विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ प्रदेश स्तर के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेंगे। बारिश के कारण प्रदेश में हुए नुकसान को देखते हुए मानसून सत्र में आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव का मुद्दा भी प्रमुख रहने की संभावना है। सड़कों, पुलों और पेयजल योजनाओं को हुए नुकसान के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को मिली राहत और सरकार की तैयारियों पर भी सवाल उठ सकते हैं।