हिमाचल हाईकोर्ट में आज (बुधवार को) कांग्रेस के छह विधायकों एवं पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) को सरकारी बंगले देने के मामले में सुनवाई होगी। कोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांग रखा है कि जब पूर्व सीपीएस ने सरकारी बंगले के लिए आवेदन तक नहीं किया, तो फिर इनके सरकारी आवास को रेगुलर क्यों किया गया? चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की बैंच ने पिछली सुनवाई में सरकार के 4 मई, 2026 के उस आदेश पर कड़ी नाराजगी जताई थी, जिसके तहत पूर्व CPS के सरकारी आवासों को सरकार ने रेगुलर किया था। खास बात यह है कि कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया था कि संबंधित पूर्व CPS ने सरकारी आवास के लिए आवेदन तक नहीं किया था। कोर्ट ने मुख्य सचिव से तीन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा- सरकार के 4 मई के फैसले पर उठे सवाल सरकार ने सरकारी आवास आवंटन (जनरल पूल) नियम, 1994 के नियम 24 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व CPS के सरकारी आवासों में प्रवास को नियमित किया था। हाईकोर्ट ने इस फैसले को रिकॉर्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है कि पूर्व CPS को दी गई इस विशेष छूट वाले फैसले पर रोक क्यों न लगा दी जाए। सरकार की नीति पर सख्त टिप्पणी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार की नीति पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि “मुझे चेहरा दिखाओ, मैं तुम्हें नियम दिखा दूंगा” की नीति पर काम हो रहा है। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि इस मामले में नोटिस जारी नहीं किया जाता तो सरकार इस पूरे मुद्दे को कालीन के नीचे दबाए रखती। सरकार ने इन्हें लगाया था सीपीएस हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने 8 जनवरी 2023 को छह विधायकों को मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किया था। इनमें कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, रोहड़ू से मोहन लाल ब्राक्टा, अर्की से संजय अवस्थी, पालमपुर से आशीष बुटेल, दून से राम कुमार चौधरी और बैजनाथ से किशोरी लाल शामिल थे। 13 नवंबर 2024 को रद्द हुई थी CPS की नियुक्तियां इन नियुक्तियों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। 13 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने छहों CPS की नियुक्तियों को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था और उनसे संबंधित सरकारी सुविधाएं वापस लेने के निर्देश दिए थे। बाद में 22 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्सों पर अंतरिम राहत दी, लेकिन CPS के पद को बहाल नहीं किया गया। अब सरकारी बंगलों के मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के बीच आज की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्य सचिव के हलफनामे से यह साफ होगा कि सरकार ने बिना आवेदन किए पूर्व CPS के आवासों को किस नियम और किस आधार पर नियमित किया तथा इस अवधि का दंडात्मक किराया कितना बनता है।

Spread the love