हिमाचल कांग्रेस नेताओं में विधानसभा चुनाव से पहले आपसी कलह खुलकर सामने आने लगी है। ठियोग में एक कार्यक्रम में वन निगम के वाइस चेयरमैन केहर सिंह ने कहा कि कुलदीप राठौर को 2022 तक ठियोग के 11 लोग भी नहीं जानते थे। हमने एकजुट होकर उन्हें जिता दिया। वन निगम वाइस चेयरमैन के इस बयान के बाद PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह, ठियोग के विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप राठौर के पक्ष में उतरे। विक्रमादित्य ने कहा कि राठौर प्रदेश कांग्रेस के कद्दावर और प्रतिष्ठित नेता है। उन्होंने एनएसयूआई अध्यक्ष से लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तक का सफर तय किया है। चार दशक कांग्रेस संगठन को मजबूत करने में दिए हैं। राठौर का संगठन के प्रति योगदान किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मंत्री ने कहा कि कुलदीप पहली बार विधानसभा चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने में उनका बड़ा योगदान रहा है। कांग्रेस को सत्ता में लाने का कुलदीप राठौर का महत्वपूर्ण योगदान विक्रमादित्य ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस को सत्ता में लाने में कुलदीप राठौर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने संगठन को मजबूत किया और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का प्रयास किया। उनके अनुसार, कांग्रेस के सत्ता में आने के पीछे जिन नेताओं ने संगठनात्मक स्तर पर मेहनत की, उनमें कुलदीप राठौर का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान पदों से नहीं, बल्कि संगठन के प्रति समर्पण और जनता के प्रति जवाबदेही से होती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की राजनीति में कुलदीप सिंह राठौर ऐसा ही एक सशक्त और प्रतिष्ठित नाम हैं। उनकी दूरदर्शी सोच, मजबूत संगठन क्षमता और जनसेवा की भावना कांग्रेस पार्टी और हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण है। प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते हैं खाची वहीं केहर सिंह के इस बयान को ठियोग विधानसभा क्षेत्र में प्रतिनिधित्व और वर्चस्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। केहर सिंह खाची को प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है। इसी वजह से उन्हें वन निगम का कैबिनेट रेंक के साथ चेयरमैन बनाया गया था। हालांकि, सरकार ने बाद में कैबिनेट रेंक वापस ले लिए थे। उन्हें अब ठियोग विधानसभा में कांग्रेस टिकट के अगले दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। राठौर भी हाईकमान के करीबी वहीं कुलदीप सिंह राठौर भी हाईकमान की नजरों में कद्दावर नेता है। इसी वजह से राठौर का नाम दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष की रेस में शामिल था। राठौर के पूर्व में प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने चार उप चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी को बुरी तरह हराया था। इसके बाद पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता भी बनाया और ठियोग विधानसभा का टिकट भी दिया।

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