हिमाचल सरकार राजधानी शिमला की प्रतिबंधित (रिस्ट्रिक्टेड) सड़कों पर वाहनों की परमिट फीस कम कर सकती है। गृह विभाग ने ऑर्डिनेंस को कैबिनेट की मंजूरी के बाद राज्यपाल की मंजूरी को भेज दिया है। गवर्नर की हरी झंडी मिलने के बाद प्रतिबंधित सड़कों की फीस कम होगी। सूत्रों के अनुसार- गृह विभाग ने परमिट फीस 10 हजार से कम करके 7500 रुपए करने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा है। इसी तरह, बिना परमिट पकड़े जाने पर लगने वाली पैनल्टी की राशि को भी कम करने का प्रस्ताव भेजा गया है। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान वाहनों की परमिट और प्रोसेसिंग फीस में चार से पांच गुणा बढ़ौतरी की थी। हिमाचल हाईकोर्ट के एडवोकेट के अलावा शहर की आम जनता इस भारी भरकम बढ़ौतरी का निरंतर विरोध कर रही है। बीते दिनों हाईकोर्ट के वकीलों ने बढ़ी हुई परमिट फीस और चालान का विरोध किया। इस बढ़ौतरी के बाद बहुत कम लोग ही परमिट लेने आगे आ रहे हैं। वकीलों ने विरोध में सचिवालय के बाहर किया था प्रदर्शन वकीलों ने सचिवालय के बाहर चक्का जाम किया। बाद में सीएम सुखविंदर सुक्खू के आश्वासन पर वकीलों ने अपना आंदोलन खत्म किया। एडवोकेट और जनता के विरोध के बाद सरकार ने ऑर्डिनेंस लाया। विधानसभा के मानसून सत्र में बिल लाकर कानून में संशोधन किया जाएगा। अभी 10 हजार फीस, 7,500 रुपए हो सकती है अभी प्रतिबंधित मार्गों पर वाहनों की परमिट फीस 10 हजार रुपए सालाना है। इसे 7500 रुपए किया जा सकता है। इसी तरह, यदि कोई वाहन बिना परमिट के पकड़ा जाता है तो उस पर 10 हजार रुपए तक के जुर्माने के भी प्रावधान संशोधित कानून में जोड़ा गया। मगर अब ऑर्डिनेंस में जुर्माना राशि भी कम की जा सकती है। बजट सत्र में क्या संशोधन किया गया? बिना परमिट जुर्माना 3000 से बढ़ाकर 10,000 रुपए किया गया। बिना परमिट गाड़ी दौड़ाने पर जुर्माना राशि 3000 से बढ़ाकर 5000 रुपए की गई। परमिट के लिए आवेदन शुल्क 100 से बढ़ाकर 500 रुपए किया गया। सालाना परमिट फीस 2500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए की गई। सील्ड रोड पर एक दिन का परमिट 200 से बढ़ाकर 1000 रुपए की गई।

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